फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोके गए सिख जत्थे का मामला: महिंदर पाल सिंह ने सरकार को शुक्रवार तक का दिया समय
कहा—धार्मिक यात्रा की अनुमति नहीं मिली तो अदालत समेत सभी उपलब्ध मंचों पर उठाएंगे मामला; NOC और वापसी टिकट को लेकर विवाद जारी
लाहौर (नज़राना टाइम्स): पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेता और पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों एवं मानवाधिकार के पूर्व संसदीय सचिव सरदार महिंदर पाल सिंह ने फैसलाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोके गए सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के मामले में सरकार को शुक्रवार तक का समय दिया है।
महिंदर पाल सिंह ने कहा कि यदि शुक्रवार तक श्रद्धालुओं को अपनी धार्मिक यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं दी गई तो वह अदालत का रुख करेंगे और मामले को सभी उपलब्ध मंचों पर उठाएंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के पीछे कोई “छिपा हाथ” है और कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह इससे संबंधित अपने पास मौजूद जानकारी उचित मंचों पर सामने रखेंगे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अब तक किसी आधिकारिक जांच में किसी व्यक्ति को जानबूझकर जत्थे की यात्रा रोकने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
निजी विवाद के कारण जत्था रोके जाने का आरोप
महिंदर पाल सिंह ने आरोप लगाया कि जत्थे को रोके जाने का मामला जत्था प्रमुख सरदार पपिंदर सिंह और सरकार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शख्सियत के बीच कथित निजी विवाद से संबंधित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि वह पपिंदर सिंह के साथ संबंधित सरकारी शख्सियत से मिलने और धार्मिक यात्रा की अनुमति दिलाने का प्रयास करने के लिए भी तैयार हैं।
सिंह ने कहा कि वह न तो खुद को सिख समुदाय से बड़ा मानते हैं और न ही किसी निजी मामले को समुदाय के हितों से ऊपर रखते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बार वह मामले में मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेंगे, चाहे ऐसी कोशिश सरदार गोपी चावला या सरदार दया सिंह की ओर से ही क्यों न की जाए।
निजी विवाद संबंधी उनके आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वापसी के हवाई टिकट की शर्त पर उठाए सवाल
महिंदर पाल सिंह ने श्रद्धालुओं से वापसी का हवाई टिकट मांगे जाने पर भी सवाल उठाया।
उनका कहना है कि जत्थे की पाकिस्तान वापसी वाघा सीमा के रास्ते निर्धारित थी। ऐसे में यदि श्रद्धालुओं को भारत से पाकिस्तान सड़क मार्ग से लौटना था तो उनसे वापसी का हवाई टिकट मांगने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए।
इस मामले में लागू यात्रा दस्तावेजों और वापसी टिकट संबंधी नियमों को लेकर सरकारी पक्ष और जत्थे के प्रतिनिधियों के बयान अलग-अलग हैं।
श्रद्धालुओं का खर्च सरकार उठाए—महिंदर पाल सिंह
महिंदर पाल सिंह ने सरकार से श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्रा को सुगम बनाने और इस घटनाक्रम के कारण उन्हें हुए खर्च की जिम्मेदारी लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि किसी औपचारिक जांच में कोई व्यक्ति बिना उचित कारण धार्मिक यात्रा में बाधा डालने या पाकिस्तान तथा देश-विदेश में बसे सिख समुदाय के बीच संबंधों को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC), फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के संबंधित अधिकारियों से माफी की मांग भी की।
महिंदर पाल सिंह ने सवाल किया कि यदि NOC अनिवार्य था तो श्रद्धालुओं को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई और आवश्यक NOC समय रहते क्यों जारी नहीं किया गया।
फैसलाबाद एयरपोर्ट पर क्या हुआ था?
यह विवाद 11 सितंबर को उस समय शुरू हुआ जब पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं का एक जत्था फैसलाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से शारजाह के रास्ते भारत जाने की तैयारी कर रहा था। उनकी धार्मिक यात्रा में श्री हेमकुंट साहिब के दर्शन भी शामिल थे।
रिपोर्टों के अनुसार, फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोके गए श्रद्धालुओं की संख्या करीब 92 थी, जबकि व्यापक समूह में भारतीय वीजा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या 104 बताई गई है।
श्रद्धालुओं के पास भारतीय वीजा थे, लेकिन NOC तथा वापसी या आगे की यात्रा से जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवाल उठने के बाद उन्हें यात्रा जारी रखने से रोक दिया गया।
रamesh सिंह अरोड़ा का पक्ष
पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और PSGPC अध्यक्ष सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने इससे पहले नज़राना टाइम्स को बताया था कि जत्थे के पास इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड से आवश्यक NOC नहीं था।
अरोड़ा के अनुसार, श्रद्धालु एकतरफा हवाई टिकटों पर यात्रा कर रहे थे और उनकी यात्रा किसी पंजीकृत टूर ऑपरेटर के माध्यम से आयोजित नहीं की गई थी।
उनका कहना था कि पाकिस्तान और भारत के बीच धार्मिक यात्राओं के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।
हालांकि, जत्थे के सदस्यों और उनके प्रतिनिधियों ने इन दावों के कुछ हिस्सों पर असहमति जताई है।
पपिंदर सिंह ने NOC संबंधी दावे पर उठाए सवाल
जत्था प्रमुख सरदार पपिंदर सिंह का कहना है कि श्रद्धालुओं को पहले यह नहीं बताया गया था कि इस यात्रा के लिए NOC अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रवाना होने से पहले ननकाना साहिब में रमेश सिंह अरोड़ा और ETPB के एक अधिकारी ने जत्थे को हवाई मार्ग के बजाय अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत जाने की सलाह दी थी।
यह आरोप विवादित है और किसी आधिकारिक जांच के जरिए इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके पास वैध पासपोर्ट और भारतीय वीजा थे तथा वे यात्रा के लिए पहले ही बड़ी रकम खर्च कर चुके थे।
जत्थे के प्रतिनिधियों के मुताबिक, टिकट और अन्य यात्रा व्यवस्थाओं पर लगभग 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपये खर्च किए गए थे।
NOC, वापसी टिकट और जिम्मेदारी पर केंद्रित विवाद
अब यह मामला मुख्य रूप से कुछ अहम सवालों पर केंद्रित है—क्या इस विशेष यात्रा के लिए ETPB या किसी अन्य प्राधिकरण का NOC अनिवार्य था, वापसी या आगे की यात्रा के टिकट को लेकर कौन से नियम लागू थे, क्या श्रद्धालुओं को इन शर्तों की पर्याप्त जानकारी पहले दी गई थी और धार्मिक यात्रा के लिए आवश्यक मंजूरी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी किस प्राधिकरण की थी।
इन सवालों का अंतिम जवाब संबंधित सरकारी नियमों, आधिकारिक रिकॉर्ड तथा किसी औपचारिक प्रशासनिक या न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही स्पष्ट हो सकेगा।
इस बीच महिंदर पाल सिंह की शुक्रवार की समय-सीमा ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि तब तक श्रद्धालुओं की यात्रा का रास्ता नहीं निकाला गया तो वह कानूनी और अन्य उपलब्ध मंचों का सहारा लेंगे।
Posted By: Ali Imran Chattha