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कर्ज और जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक वित्तीय ढांचे में सुधार जरूरी: अहसन इकबाल

02 Nov, 2026 06:51 PM

इस्लामाबाद (नज़राना टाइम्स): पाकिस्तान के योजना, विकास एवं विशेष पहल मंत्री प्रो. अहसन इकबाल ने बढ़ते कर्ज, जलवायु आपदाओं और तकनीकी बदलावों से निपटने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे के पुनर्गठन का आह्वान किया है।

वह सोमवार को अल्लामा इकबाल ओपन यूनिवर्सिटी में सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एसडीपीआई) द्वारा आयोजित चार दिवसीय 29वें सतत विकास सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय “व्यवधानों के दौर में विकास पर पुनर्विचार” है।

मौजूदा वित्तीय संस्थानों में सुधार की जरूरत

अहसन इकबाल ने कहा कि मौजूदा बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों में 21वीं सदी की विकास संबंधी चुनौतियों, विशेषकर जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों की बढ़ती वित्तीय असुरक्षा, का पर्याप्त समाधान करने की क्षमता नहीं है।

उन्होंने ऐसे नए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे की जरूरत बताई, जो जलवायु आपदाओं और अन्य उभरती चुनौतियों का सामना कर रहे देशों की सहायता कर सके।

मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को तकनीकी बदलावों के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाते हुए बुनियादी शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीक अपनाने की क्षमता, उद्यमिता और संस्थागत मजबूती में निवेश करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने वर्ष 2035 तक एक ट्रिलियन डॉलर और स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है।

दक्षिण एशिया के लिए नए विकास मॉडल का प्रस्ताव

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार राशिद अलमहमूद तितुमीर ने औद्योगिक परिवर्तन, क्षेत्रीय उत्पादन नेटवर्क, सम्मानजनक रोजगार और मजबूत सामाजिक सुरक्षा पर आधारित नए दक्षिण एशियाई विकास दृष्टिकोण का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान का सहयोग क्षेत्र के लिए उदाहरण बन सकता है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में हो रहे संरचनात्मक बदलावों के कारण विकासशील देशों को पारंपरिक रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा।

तितुमीर ने कहा कि मौजूदा व्यवधान केवल बाहरी झटके नहीं हैं। वे औद्योगीकरण, रोजगार सृजन, घरेलू संसाधन जुटाने, विकास के वित्तपोषण और आर्थिक संप्रभुता की परिस्थितियों को बदल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बांग्लादेश अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर विनिर्माण केंद्र और निर्यात का प्रवेश द्वार बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

अतिरिक्त कर्ज के बजाय इक्विटी निवेश पर जोर

जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण समन्वय मंत्री मुसद्दिक मलिक ने गरीब हितैषी विकास मॉडल की जरूरत बताई। उन्होंने अतिरिक्त कर्ज पर निर्भर विकास की नीति को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान इक्विटी निवेश और ऋण अदला-बदली व्यवस्थाओं के लिए तैयार है।

मलिक ने बताया कि पाकिस्तान लगभग 16 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का राजस्व एकत्र करता है, जिसमें से करीब आठ ट्रिलियन रुपये कर्ज और ब्याज की अदायगी पर खर्च हो जाते हैं। उन्होंने इसे कुल राजस्व का लगभग 48–49 प्रतिशत बताया।

उन्होंने कहा कि विकास न्यायसंगत, टिकाऊ और अधिक राष्ट्रीय स्वामित्व वाला होना चाहिए।

एआई से रोजगार और एक करोड़ डॉलर का कार्यक्रम

मलिक ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग युवाओं की नौकरियां समाप्त करने के बजाय रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि स्नातक युवा बलोची, ब्राहुई, सिंधी और उर्दू सहित क्षेत्रीय भाषाओं में एआई प्रणालियों को प्रशिक्षित करने में योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने वैज्ञानिक प्रयोगों और नवाचारी समाधानों के लिए युवाओं को इक्विटी आधारित निवेश उपलब्ध कराने हेतु एक करोड़ डॉलर के “ग्रीन फील्ड” कार्यक्रम की घोषणा की। पहला मुकाबला तीन महीने के भीतर आयोजित करने की योजना है।

सतत विकास प्रदर्शनी और प्रकाशनों का विमोचन

उद्घाटन सत्र को एसडीपीआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. आबिद कय्यूम सुलेरी, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष शफकत काकाखेल और अल्लामा इकबाल ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति नासिर महमूद ने भी संबोधित किया।

उन्होंने सतत विकास, क्षेत्रीय सहयोग और उभरती वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप विकास रणनीतियां तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अगले सत्र में संकटों का सामना करने में सक्षम विकास के लिए विचारों, निवेश और परिणामों को जोड़ने पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने पाकिस्तान के विकास एजेंडे में पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक समानता को शामिल करने की जरूरत बताई।

सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार मंत्री शज़ा फातिमा ख्वाजा और प्रधानमंत्री की जलवायु परिवर्तन समन्वयक रोमीना खुर्शीद आलम ने सतत विकास प्रदर्शनी 2026 के उद्घाटन समारोह में भाग लिया।

इस अवसर पर एसडीपीआई की पुस्तक “Sustainable Development in the Emerging World Disorder” का विमोचन किया गया। इसमें 28वें सम्मेलन की प्रमुख नीतिगत सिफारिशें शामिल हैं। साथ ही “Journal of Development Policy Research and Practice” का दसवां खंड भी जारी किया गया।

निजी क्षेत्र को प्रमुख भागीदार माना जाए: डॉ. सुलेरी

डॉ. सुलेरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र को प्रमुख भागीदार के रूप में मान्यता देना जरूरी है। सरकारें अकेले आवश्यक वित्त, नवाचार और तकनीकी विशेषज्ञता नहीं जुटा सकतीं।

उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय स्थिरता को मुनाफे में बाधा मानने की धारणा बदल रही है। पर्यावरण अनुकूल कारोबार अधिक प्रतिस्पर्धी और आर्थिक रूप से कुशल साबित हो रहे हैं।

उन्होंने पाकिस्तानी उद्योगों को यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) सहित बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यापार आवश्यकताओं के लिए तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने स्वच्छ उत्पादन और कार्बन उत्सर्जन की पारदर्शी रिपोर्टिंग का महत्व भी बताया।

डेनमार्क ने ऊर्जा दक्षता और हरित सहयोग पर दिया जोर

पाकिस्तान में डेनमार्क की राजदूत मार्था मोर्सिंग ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और संसाधनों की सीमाएं वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए बढ़ते खतरे हैं। उन्होंने सरकारों, कारोबारों और शोध संस्थानों के बीच सहयोग की जरूरत बताई।

डेनमार्क का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ संभव हैं। उनके अनुसार, डेनमार्क ने कार्बन उत्सर्जन घटाते हुए अपनी अर्थव्यवस्था का विस्तार किया है।

उन्होंने ऊर्जा दक्षता को सबसे सस्ता उपलब्ध ऊर्जा संसाधन बताया और हरित ऊर्जा, ऊर्जा बचत तकनीकों तथा टिकाऊ औद्योगिक समाधानों में पाकिस्तान के साथ व्यावसायिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

2035 तक 550 अरब डॉलर से अधिक जलवायु निवेश की जरूरत: ओआईसीसीआई

ओवरसीज इन्वेस्टर्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ओआईसीसीआई) के प्रतिनिधि उमर अहसन ने जलवायु परिवर्तन को पाकिस्तान के लिए अस्तित्व से जुड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार आने वाली आपदाएं आर्थिक स्थिरता, आजीविका और विकास की संभावनाओं को कमजोर कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 की बाढ़ से 30 अरब डॉलर से अधिक की क्षति और आर्थिक नुकसान हुआ था। इससे वे संसाधन आपदा से निपटने में लगाने पड़े, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और उत्पादक निवेश पर खर्च किए जा सकते थे।

ओआईसीसीआई की रिपोर्ट “Climate Acceleration: From Commitment to Competitive Edge in a Decisive Decade” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को 2035 तक 550 अरब डॉलर से अधिक, यानी लगभग 50 अरब डॉलर सालाना जलवायु संबंधी निवेश की जरूरत है।

उन्होंने इसकी तुलना लगभग 15 अरब डॉलर के संयुक्त संघीय और प्रांतीय विकास बजट से करते हुए कहा कि केवल सरकारी वित्त से यह अंतर पूरा नहीं हो सकता।

उन्होंने अधिक निजी निवेश, वित्तपोषण योग्य जलवायु परियोजनाओं, स्थिर नीतियों और रियायती वित्त तक बेहतर पहुंच की मांग की।

जलवायु कार्रवाई में सामाजिक समानता जरूरी

उमर अहसन ने कहा कि महिलाओं, छोटे किसानों, कमजोर समुदायों और छोटे कारोबारों को ऐसे संसाधन मिलने चाहिए, जिनसे वे पानी की कमी, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और कृषि संबंधी व्यवधानों का सामना कर सकें।

उन्होंने कारोबारों से विश्वसनीय पर्यावरणीय रिपोर्टिंग अपनाने और पर्यावरण अनुकूल होने के भ्रामक दावों से बचने की अपील की। उन्होंने नीति निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों से जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे तथा टिकाऊ उत्पादन में निवेश आसान बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में जलवायु अनुकूलन, चक्रीय अर्थव्यवस्था, स्वच्छ ऊर्जा, सतत कृषि, डिजिटल नवाचार और समावेशी विकास की व्यावहारिक पहलों को सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया।

Posted By: Ali Imran Chattha

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