लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी में अली उस्मान बाजवा के पंजाबी कहानी संग्रह ‘पहली रोटी’ का विमोचन

लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी में अली उस्मान बाजवा के पंजाबी कहानी संग्रह ‘पहली रोटी’ का विमोचन

लाहौर (नज़राना टाइम्स): पंजाब यूनिवर्सिटी के ओरिएंटल कॉलेज, लाहौर में युवा कथाकार अली उस्मान बाजवा के पंजाबी कहानी संग्रह पहली रोटी का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ पंजाबी एंड कल्चरल स्टडीज़ की पंजाबी अदबी मजलिस ने किया। लाहौर के सांझ पब्लिकेशंस से प्रकाशित इस संग्रह में 13 कहानियां हैं।

ओरिएंटल कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. डॉ. नबीला रहमान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इंस्टीट्यूट ऑफ पंजाबी एंड कल्चरल स्टडीज़ के निदेशक प्रो. डॉ. नवीद शहज़ाद की मौजूदगी में सांझ पब्लिकेशंस के प्रकाशक अमजद सलीम मिनहास ने लेखक और पुस्तक का परिचय दिया।

संग्रह की तीन कहानियों की विस्तार से समीक्षा

जीसी यूनिवर्सिटी, लाहौर के पंजाबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ज़हीर वट्टू ने संग्रह की तीन कहानियों गोगो, पूरने और घड़ी सियाणफ़ की विस्तार से समीक्षा की। पंजाब यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ पंजाबी एंड कल्चरल स्टडीज़ के सहायक प्रोफेसर डॉ. मुहम्मद इरफान उल हक ने भी संग्रह पर अपने विचार रखे।

बाजवा ने पढ़कर सुनाई ‘पहली रोटी’

अली उस्मान बाजवा ने अपनी लेखन यात्रा के बारे में बात की और पंजाबी भाषा तथा साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संग्रह की शीर्षक कहानी पहली रोटी पढ़कर सुनाई, जिसे श्रोताओं ने सराहा। कहानी पाठ के बाद विद्यार्थियों और मेहमानों ने लेखक से सवाल पूछे।

पंजाबी कथा साहित्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. नबीला रहमान ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को विषय बनाने के लिए घड़ी सियाणफ़ की सराहना की। उन्होंने इसे आधुनिक पंजाबी कथा साहित्य में मील का पत्थर बताया। विमोचन के दौरान इसे पाकिस्तान में एआई पर लिखी गई पहली पंजाबी लघुकथा के रूप में पेश किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक और विभिन्न क्षेत्रों से आए मेहमान शामिल हुए। समारोह का समापन चाय और जलपान के साथ हुआ।

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