गुरदासपुर पुलिस मुठभेड़ मामला: कोर्ट ने SHO से रिपोर्ट तलब की, स्वतंत्र पोस्टमार्टम और न्यायिक जांच की मांग

गुरदासपुर पुलिस मुठभेड़ मामला: कोर्ट ने SHO से रिपोर्ट तलब की, स्वतंत्र पोस्टमार्टम और न्यायिक जांच की मांग

गुरदासपुर,नज़राना टाइम्स,कंवरप्रताप सिंह 

रणजीत सिंह की माता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरदासपुर कोर्ट ने पुराना शाला थाने के SHO से कथित पुलिस मुठभेड़ के संबंध में रिपोर्ट तलब की है।
यह मामला गुरदासपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सुखजिंदर कौर द्वारा दायर आवेदन से संबंधित है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गई हैं:


1. चिकित्सकीय और फोरेंसिक जांच
• स्वतंत्र पोस्टमार्टम – मृतक (रणजीत सिंह) का पोस्टमार्टम PGI चंडीगढ़ या उसी स्तर के किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड से कराया जाए।
• वीडियोग्राफी – पारदर्शिता सुनिश्चित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकने के लिए पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए।
• पुलिस कर्मियों की जांच – CIA इंचार्ज गुरमीत सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों को लगी कथित गोली के घावों की सत्यता की जांच के लिए एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए।
• फोरेंसिक जांच – मृतक और घायल पुलिसकर्मियों के गनशॉट रेजिड्यू (GSR) टेस्ट, घावों का विश्लेषण तथा गोली के मार्ग (बुलेट ट्रैजेक्टरी) की जांच कराई जाए।
 

2. साक्ष्यों का संरक्षण
याचिका में साक्ष्यों को नष्ट या परिवर्तित होने से बचाने के लिए निम्नलिखित सामग्री को तुरंत सील कर सुरक्षित रखने की मांग की गई है:
• डिजिटल रिकॉर्ड – मृतक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (एसएसपी गुरदासपुर, दोरांगला और बहिरामपुर के एसएचओ, CIA इंचार्ज आदि) के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तथा GPS/लोकेशन डेटा।
• भौतिक साक्ष्य – कथित रूप से बरामद हथियार, मृतक के कपड़े, विसरा नमूने, गोलियां और बैलिस्टिक सामग्री।
• सरकारी रिकॉर्ड – मालखाना प्रविष्टियां और कथित रूप से घायल पुलिसकर्मियों के मेडिकल रिकॉर्ड।
• सीसीटीवी फुटेज – संबंधित क्षेत्र तथा मृतक के गांव से पुलिस द्वारा कब्जे में ली गई सीसीटीवी फुटेज और DVR।
 

3. जांच और कानूनी निगरानी
• स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच – जांच ऐसी एजेंसी को सौंपी जाए जो संबंधित पुलिस स्टेशन (पुराना शाला) के अधीन न हो, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
• न्यायिक जांच – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 196 के तहत मृत्यु के कारणों की औपचारिक न्यायिक जांच शुरू की जाए।
• कानूनी अनुपालन – पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप हो।
 

4. मानवाधिकार और सुरक्षा
• सम्मान और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार – संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मृतक के सम्मान और निष्पक्ष प्रक्रिया के अधिकार को सुनिश्चित किया जाए।
• दबाव से सुरक्षा – याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अधिकारियों द्वारा परिवार पर कानूनी कार्रवाई छोड़ने और जल्द अंतिम संस्कार करने के लिए दबाव डाला जा रहा है, जिसे रोका जाए।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट डॉ. सुप्रीत कौर ने आदेश दिया कि आवेदन दर्ज किया जाए और 28 फरवरी 2026 तक पुराना शाला थाने के SHO से रिपोर्ट मंगाई जाए। राज्य की ओर से उपस्थित APP को भी सूचित किया गया है और आवश्यक हो तो जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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