भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव की 45 दिवसीय महा संध्या फेरियों का भावपूर्ण एवं भव्य समापन

भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव की 45 दिवसीय महा संध्या फेरियों का भावपूर्ण एवं भव्य समापन

कपूरथला,16 जुलाई गौरव मढिया 
श्री श्री राधा श्यामसुंदर मंदिर, इस्कॉन कपूरथला द्वारा भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव के उपलक्ष्य में पिछले 45 दिनों से निरंतर चल रही दिव्य महा संध्या फेरियों का गत दिवस 15 जुलाई 2026 को अत्यंत भव्य, अलौकिक एवं भाव-विभोर वातावरण में पूर्णाहुति के साथ समापन किया गया। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि भगवान श्री जगन्नाथ जी की असीम करुणा, वैष्णवों की निःस्वार्थ सेवा और श्रीनाम संकीर्तन के प्रचार का एक दिव्य महायज्ञ था, जिसने पूरे कपूरथला नगर को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया।


वैदिक शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है—
"हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलम्।
कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा॥"
अर्थात कलियुग में केवल भगवान के पवित्र नाम का कीर्तन ही जीवों के कल्याण का एकमात्र उपाय है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भगवद्गीता में अपने भक्तों की महिमा का वर्णन करते हुए बताते हैं कि जो भक्त उनके संदेश और उनके पवित्र नाम का प्रचार घर-घर तक पहुँचाता है, वह उन्हें अत्यंत प्रिय होता है।


इसी दिव्य आदेश का पालन करते हुए इस्कॉन कपूरथला के समर्पित भक्तों ने लगातार 45 दिनों तक नगर की प्रत्येक गली, प्रत्येक मोहल्ले और सैकड़ों घरों में भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी के दिव्य दर्शन कराए। जिन घरों तक शायद वर्षों से कोई आध्यात्मिक कार्यक्रम नहीं पहुँचा था, वहाँ स्वयं भगवान अपने भक्तों के साथ पधारे। यह दृश्य प्रत्येक भक्त के लिए अविस्मरणीय और भाव-विभोर कर देने वाला था। सैकड़ों परिवारों ने भगवान की आरती, पुष्प सेवा, भोग सेवा और संकीर्तन सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया तथा अपने जीवन को धन्य बनाया।
इस दिव्य महायज्ञ की पूर्णाहुति प्रकाश्यभनियों श्रीमती वंदना शाह जी, श्रीमती वंदना अग्रवाल जी एवं श्री पवन अग्रवाल जी के पावन निवास स्थान से प्रथम आरती के साथ हुई। वहाँ भक्तों ने भगवान का भव्य स्वागत किया, मंगल आरती की तथा हरिनाम संकीर्तन के मध्य भगवान श्री जगन्नाथ जी नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान किए। इसके पश्चात अनेक श्रद्धालु परिवारों के घरों में भगवान को ले जाकर उनके दिव्य दर्शन कराए गए। प्रत्येक स्थान पर श्रद्धा, भक्ति और प्रेम का ऐसा वातावरण था मानो स्वयं श्रीधाम वृंदावन कपूरथला में अवतरित हो गया हो।


इस दिव्य यात्रा का अंतिम एवं ऐतिहासिक पड़ाव इस्कॉन कपूरथला के वरिष्ठ वैष्णव एच.जी. नकुल दास प्रभु जी एवं विरजा देवी दासी माता जी के पावन निवास स्थान पर हुआ, जहाँ भगवान श्री जगन्नाथ जी के स्वागत के लिए भक्तों का विशाल जनसमूह एकत्रित हुआ। भगवान के आगमन पर पुष्पवर्षा, जयघोष, शंखध्वनि और हरे कृष्ण महामंत्र के गगनभेदी संकीर्तन से सम्पूर्ण वातावरण गुंजायमान हो उठा। भक्तों ने भाव-विभोर होकर नृत्य किया और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं वृंदावन धाम की दिव्य अनुभूति कपूरथला में साकार हो गई हो।


सैकड़ों भक्त प्रभु के दिव्य दर्शन करते हुए भावुक हो उठे। सभी के हृदय में यही भावना थी कि कितने कृपालु हैं हमारे प्रभु श्री जगन्नाथ, जो किसी भेदभाव के बिना स्वयं अपने भक्तों के घर-घर जाकर प्रत्येक जीव पर अपनी अहैतुकी कृपा बरसाते हैं। भगवान का यह करुणामय स्वरूप प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय को भक्ति से भर रहा था।
इस अवसर पर एच.जी. नकुल दास प्रभु जी ने अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में सभी सेवकों, सहयोगियों और भक्त परिवारों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन 45 दिनों में असंख्य भक्तों ने भीषण गर्मी, तेज धूप, उमस, वर्षा और प्रतिकूल परिस्थितियों की तनिक भी परवाह किए बिना प्रतिदिन भगवान के रथ यात्रा महोत्सव का निमंत्रण घर-घर पहुँचाया। अनेक भक्त प्रतिदिन कई-कई घंटे पैदल चलकर लोगों को भगवान के दर्शन कराने में लगे रहे। यह सेवा वास्तव में भगवान श्री जगन्नाथ जी की विशेष कृपा का प्रमाण है।
उन्होंने विशेष रूप से संकीर्तन मंडली के प्रत्येक सदस्य का अभिनंदन किया, जिन्होंने चार-चार घंटे तक निरंतर मृदंग, करताल और मधुर हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से सम्पूर्ण नगर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने उन सभी भक्तों का भी अभिनंदन किया जिन्होंने अपने व्यक्तिगत कार्यों, व्यापार और पारिवारिक व्यस्तताओं को पीछे रखकर भगवान के साथ कदम से कदम मिलाकर इस महायज्ञ को सफल बनाया। प्रभु जी के भावपूर्ण शब्द सुनकर अनेक भक्तों की आँखें नम हो गईं और वातावरण अत्यंत भावुक एवं आध्यात्मिक हो उठा।
समापन समारोह के उपरांत भगवान श्री जगन्नाथ जी को अत्यंत प्रेमपूर्वक खिचड़ी महाभोग, विविध प्रकार के ताजे फल, शीतल शरबत, पवित्र जल तथा अनेक प्रकार के स्वादिष्ट मिष्ठानों का भोग अर्पित किया गया। इसके पश्चात महाआरती सम्पन्न हुई और उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक महाप्रसाद ग्रहण कर भगवान की कृपा प्राप्त की।


प्रभु जी ने समस्त नगरवासियों एवं भक्तों से आग्रह किया कि आगामी 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा में अपने परिवार सहित अवश्य सम्मिलित हों। उन्होंने कहा कि भगवान के दिव्य रथ की रस्सी खींचना कोई साधारण अवसर नहीं, बल्कि यह अनंत जन्मों के पुण्यों से प्राप्त होने वाला दुर्लभ सौभाग्य है। भगवान श्री जगन्नाथ के रथ को खींचते हुए श्रद्धालु अपने हृदय को शुद्ध कर भगवान की विशेष कृपा और भक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
45 दिवसीय महा संध्या फेरियों का यह अलौकिक अभियान इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया कि जब भक्तगण पूर्ण समर्पण, प्रेम और निःस्वार्थ भावना से भगवान की सेवा में लग जाते हैं, तब एक पूरा नगर आध्यात्मिक चेतना से जागृत हो उठता है। इस्कॉन कपूरथला द्वारा आयोजित यह महा संध्या फेरी अभियान नगर के इतिहास में सदैव एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में स्मरण किया जाएगा, जिसने अनगिनत लोगों के जीवन में हरिनाम, भक्ति और भगवान श्री जगन्नाथ जी की असीम करुणा का प्रकाश फैलाया।

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