साधु-संग की दिव्य छाया में हरिनाम से गुंजा मॉल रोड एवं सन्नी साइड — श्री जगन्नाथ जी की संध्या फेरी बनी कृष्ण-प्रेम का महासंगम
- धार्मिक
- 11 Jul, 2026 10:02 AM (Asia/Kolkata)
कपूरथला,11 जुलाई गौरव मढिया
“साधु-संग, साधु-संग — सर्वशास्त्र कहे। लव मात्र साधु-संग, सर्व सिद्धि होय।”
शास्त्रों का यह दिव्य वचन पावन गलियों में साक्षात् चरितार्थ होता हुआ दिखाई दिया।
भगवान श्री जगन्नाथ जी की 19 जुलाई को होने वाली भव्य रथयात्रा के उपलक्ष्य में इस्कॉन कपूरथला द्वारा नगर के प्रत्येक क्षेत्र में संध्या फेरियों का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से स्वयं भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी प्रत्येक घर तक अपनी करुणा, प्रेम और कृपा का संदेश पहुँचा रहे हैं। सैकड़ों श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन में सम्मिलित होकर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं।
कपूरथला वासियों का सौभाग्य रहा कि इन दिव्य संध्या फेरिओं में भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त, ब्रह्मचारी जीवन को पूर्णतः श्रीकृष्ण-भक्ति एवं विश्वव्यापी प्रचार-सेवा के लिए समर्पित आदरणीय नरोत्तम आनंद प्रभु जी का पावन आगमन हुआ। उनके श्रीमुख से निकले मधुर भजन, हृदयस्पर्शी कीर्तन और प्रेममयी वाणी ने उपस्थित प्रत्येक भक्त के अंतःकरण में कृष्ण-प्रेम की नवीन चेतना जागृत कर दी। भक्तगण नृत्य करते हुए "जय जगन्नाथ! जय जगन्नाथ!" के जयघोष से सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर रहे थे।

कॉलोनी के निवासियों ने भगवान के स्वागत में पुष्पवर्षा कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। प्रत्येक घर के द्वार पर भगवान की आरती उतारी गई, भोग अर्पित किया गया तथा साधु-संतों के दर्शन कर लोगों ने अपने जीवन को कृतार्थ अनुभव किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं श्रीधाम वृन्दावन की मधुर अनुभूति कपूरथला की गलियों में उतर आई हो।
इस दिव्य संध्या फेरी की प्रथम आरती का परम सौभाग्य श्री नरेश कुमार कालिया जी एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ। भगवान श्री जगन्नाथ जी रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हुए संकीर्तन के मध्य नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान किए। सम्पूर्ण मार्ग में हरिनाम संकीर्तन, मृदंग, करताल तथा "हरिबोल! हरिबोल!" के गगनभेदी उद्घोष से वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से भर उठा।
यात्रा का समापन श्री दिनेश अग्रवाल जी, श्री विकास अग्रवाल जी (अग्रवाल पेंट्स) के निवास स्थान पर हुआ, जहाँ उनके समस्त परिवार ने अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और प्रेमपूर्वक पुष्पवर्षा कर भगवान श्री जगन्नाथ जी का भव्य स्वागत किया। नृत्य एवं संकीर्तन के मध्य ठाकुर जी को आदरपूर्वक विराजमान कराया गया, जिसके उपरांत प्रभु जी ने अत्यंत प्रेरणादायक एवं हृदयस्पर्शी कथा का रसपान कराया।
अपने उद्बोधन में प्रभु जी ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ के रथ की रस्सी को केवल हाथों से नहीं, अपितु प्रेम और समर्पण से खींचना चाहिए। जिस प्रकार व्रज की गोपियों ने प्रेमपूर्वक भगवान को वृन्दावन ले जाने की उत्कट भावना प्रकट की थी, उसी प्रकार प्रत्येक भक्त को भगवान को अपने हृदय रूपी वृन्दावन में विराजमान करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ कलियुग के ऐसे करुणामय भगवान हैं, जो भक्तों द्वारा प्रेम और श्रद्धा से अर्पित किए गए अन्न के एक छोटे से अंश को भी अनन्त कृपा के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने सभी नगरवासियों से आग्रह किया कि 19 जुलाई को होने वाली भव्य रथयात्रा में भगवान श्री जगन्नाथ जी को अर्पित किए जाने वाले छप्पन भोग महोत्सव में प्रत्येक परिवार अपनी श्रद्धानुसार कोई न कोई भोग अवश्य लेकर आए और भगवान की असीम कृपा का पात्र बने।

कार्यक्रम के समापन पर अग्रवाल परिवार द्वारा महा आरती सम्पन्न की गई तथा समस्त वैष्णवों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए प्रेमपूर्वक महाप्रसाद की व्यवस्था की गई।
इस अवसर पर इस्कॉन कपूरथला के संचालक नकुल दास (नीरज अग्रवाल) ने कॉलोनी के समस्त निवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ जी का इतना प्रेममय एवं भव्य स्वागत निश्चय ही भगवान को अत्यंत प्रिय लगा होगा और उनकी कृपा पूरे क्षेत्र पर अवश्य बरसेगी। उन्होंने समस्त नगरवासियों से निवेदन किया कि वे अपने परिवार सहित 19 जुलाई को होने वाली भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा में अवश्य सम्मिलित होकर अपने जीवन को सफल एवं धन्य बनाएं।
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