महाराजा रणजीत सिंह की अनमोल पगड़ी बनी अंतरराष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र
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- (Asia/Kolkata)
अली इमरान चठ्ठा लाहौर (नज़राना टाइम्स)
सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह द्वारा उपहार में दी गई एक दुर्लभ ऊनी पगड़ी लंदन में आयोजित बोनहैम्स इस्लामिक एंड इंडियन आर्ट नीलामी में £165,500 में बिकी।
यह पगड़ी वर्ष 1808 में महाराजा रणजीत सिंह ने ब्रिटिश दूत चार्ल्स थियोफिलस मेटकाफ़ को भेंट की थी। यह उपहार 1809 की अमृतसर संधि के वार्तालापों के दौरान दिया गया था, जिसने सतलज नदी के पश्चिम में रणजीत सिंह के शासन को औपचारिक रूप से मान्यता दी।
शुरुआती अनुमान £20,000 का था, लेकिन पगड़ी अपनी उत्कृष्ट स्थिति और ऐतिहासिक महत्त्व के कारण उम्मीद से कई गुना अधिक कीमत पर बिकी। इसे मेटकाफ़ परिवार ने पीढ़ियों तक संभाल कर रखा था।
इतिहासकारों का कहना है कि यह बिक्री सिख साम्राज्य की विरासत और उसकी सांस्कृतिक व कूटनीतिक भव्यता में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाती है।
"पंजाब के शेर" के नाम से प्रसिद्ध महाराजा रणजीत सिंह ने 1801 से 1839 तक शासन किया और लाहौर को शक्ति, कला और संस्कृति का केंद्र बनाया।
सिख म्यूज़ियम इनिशिएटिव के गुरिंदर सिंह मान ने कहा,
“ऐसे ऐतिहासिक वस्त्र केवल उपहार नहीं बल्कि सिख दरबार की प्रतिष्ठा, शिल्पकला और कूटनीति के प्रतीक हैं।”
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