पाकिस्तान, अफगान तालिबान और चीन की उरुमकी में वार्ता – स्थायी युद्धविराम की दिशा में प्रयास
- इंटरनेशनल
- (Asia/Kolkata)
उरुमकी / इस्लामाबाद / काबुल – नजराना टाइम्स: एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम में, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को चीन के शहर उरुमकी में उच्च स्तरीय वार्ता की। इस बैठक का उद्देश्य कई हफ्तों से जारी सीमा पार हिंसा को रोकना और स्थायी युद्धविराम स्थापित करना है।
यह वार्ता चीन के संवेदनशील शिनजियांग क्षेत्र में आयोजित की गई, जो फरवरी के अंत से बढ़ते तनाव को कम करने का सबसे गंभीर प्रयास मानी जा रही है।
चीन की मध्यस्थता
चीन एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है। यह वार्ता पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार की हालिया बीजिंग यात्रा के बाद संभव हुई।
अफगानिस्तान के लिए चीन के विशेष दूत यूए शियाओयोंग ने इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई है।
मुख्य मुद्दे -पाकिस्तान की मुख्य मांग है कि अफगानिस्तान अपनी भूमि से टीटीपी द्वारा किए जा रहे हमलों को रोके।
वहीं, अफगान तालिबान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि -तनाव 26 फरवरी को पाकिस्तान द्वारा “ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक” शुरू करने के बाद बढ़ गया।
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल में हवाई हमले का आरोप लगाया, जिसे पाकिस्तान ने नकार दिया।
व्यापार और सीमा मुद्दे - सीमा बंद होने से व्यापार पर असर पड़ा। पाकिस्तान ने सीमा मार्ग खुले रखने का आश्वासन दिया है।
पहले के प्रयास असफल - कतर, तुर्की और सऊदी अरब द्वारा किए गए प्रयास केवल अस्थायी साबित हुए।
विशेषज्ञों की राय - विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी समझौते के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली आवश्यक होगी।
अनिश्चित परिणाम - वार्ता जारी है, लेकिन अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दे सुलझना बाकी हैं।
निष्कर्ष: - चीन की मध्यस्थता से नई उम्मीद जगी है, लेकिन स्थायी युद्धविराम के लिए दोनों देशों को ठोस और भरोसेमंद कदम उठाने होंगे।
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