मक्का डिफेंस अलायंस के विस्तार का रास्ता खुला, तुर्की ने दिए संकेत
- इंटरनेशनल
- (Asia/Kolkata)
इस्तांबुल, तुर्की — नज़राना टाइम्स अली इमरान चठ्ठा
पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने सोमवार को अपने त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के तहत पहली उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक के दौरान “मक्का डिफेंस अलायंस” की संस्थागत स्थापना की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की गई और सहमति बनी कि गठबंधन का पहला महासचिव पाकिस्तान से होगा।
स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी की बैठक इस्तांबुल में हुई। यह बैठक तीनों देशों द्वारा 7 अगस्त को मक्का में मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जाने के एक महीने से भी कम समय बाद हुई है।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने बताया कि गठबंधन का सचिवालय रियाद में स्थापित किया जाएगा और इसका पहला महासचिव पाकिस्तानी अधिकारी होगा।
फिदान ने कहा कि गठबंधन की संस्थागत संरचना स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
समझौते में सामूहिक रक्षा प्रावधान शामिल है। इसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों सदस्यों पर हमला माना जाएगा। इस सिद्धांत की तुलना NATO के अनुच्छेद 5 से की जा रही है।
फिदान ने जोर देकर कहा कि यह गठबंधन पूरी तरह रक्षात्मक है और किसी विशेष देश के खिलाफ निर्देशित नहीं है।
उन्होंने कहा कि गठबंधन का उद्देश्य सदस्य देशों की सुरक्षा की रक्षा करना है और इसका मकसद अन्य देशों के खिलाफ युद्ध को बढ़ाना नहीं है। उनके अनुसार तीनों देश क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
फिदान ने कहा कि समझौता अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान तथा घरेलू मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांतों पर आधारित है।
उन्होंने यह भी बताया कि गठबंधन भविष्य में अन्य देशों के लिए खुला रहेगा और नए सदस्य देशों को शामिल करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर काम हो रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले गठबंधन की संस्थागत नींव मजबूत करना जरूरी है।
इस्तांबुल में हुई बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ सैन्य प्रमुखों ने भी हिस्सा लिया।
पाकिस्तान की ओर से उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर शामिल हुए।
तुर्की की ओर से विदेश मंत्री हाकान फिदान, राष्ट्रीय रक्षा मंत्री यासर गुलर और चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल सेल्चुक बायराक्तरोग्लू मौजूद रहे।
सऊदी अरब का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान, रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल फैयाज बिन हामिद अल-रुवैली ने किया।
बैठक में रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, सैन्य सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी, संयुक्त उत्पादन सहित रक्षा उद्योग सहयोग, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और संस्थागत सहयोग तंत्र स्थापित करने पर चर्चा हुई।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के व्यापक प्रभाव खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र तक पहुंचने की बात कही गई है।
फिदान ने इस संघर्ष को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया और दोनों पक्षों से आगे तनाव बढ़ाने से बचने का आह्वान किया।
इजरायल द्वारा तुर्की को रणनीतिक खतरा बताए जाने संबंधी सवाल पर फिदान ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कड़ी आलोचना की और उनके खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।
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