शालीमार एवेन्यू बना श्री पुरी धाम — 20वीं संध्या फेरी में उमड़ा कृष्ण प्रेम का सागर

शालीमार एवेन्यू बना श्री पुरी धाम — 20वीं संध्या फेरी में उमड़ा कृष्ण प्रेम का सागर

कपूरथला 20 जून गौरव मढिया 
आगामी 19 जुलाई को आयोजित होने वाली भव्य भगवान श्री जगन्नाथ रथयात्रा के उपलक्ष्य में चल रही दिव्य संध्या फेरियों की श्रृंखला में गत दिवस शालीमार एवेन्यू में बीसवीं संध्या फेरी अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुई। इस अवसर पर सैकड़ों भक्तों ने भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी के दिव्य नाम-संकीर्तन में सहभागिता कर संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और कृष्ण प्रेम से सराबोर कर दिया।


भगवान श्री जगन्नाथ अपनी मनोहर गोल-गोल कमलनयन दृष्टि से समस्त भक्तों पर कृपा बरसाते हुए सुंदर पुष्पों से सुसज्जित पालकी में विराजमान हुए। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं नीलाचल धाम के स्वामी अपने भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकले हों। भक्तगण हरिनाम संकीर्तन करते हुए, नृत्य करते हुए और "जय जगन्नाथ" के जयघोष से आकाश को गुंजायमान करते हुए प्रभु को घर-घर दर्शन करवाने ले जा रहे थे।
संध्या फेरी का शुभारंभ श्री रोहित मल्होत्रा जी एवं परिवार के निवास स्थान से हुआ, जहाँ परिवारजनों को भगवान की प्रथम आरती का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान को विविध प्रकार के भोग अर्पित किए, पुष्प वर्षा की तथा भावपूर्ण कीर्तन के मध्य प्रभु का स्वागत किया। भगवान के चरणकमलों का स्पर्श पाकर समस्त परिवार स्वयं को धन्य अनुभव कर रहा था। तत्पश्चात प्रभु को अन्य मोहल्लावासियों को दर्शन देने हेतु प्रेमपूर्वक विदा किया गया।


ज्यों-ज्यों संध्या फेरी आगे बढ़ती गई, त्यों-त्यों शालीमार एवेन्यू की गलियाँ मानो श्री जगन्नाथपुरी धाम का स्वरूप धारण करती प्रतीत हुईं। बालक, युवा, वृद्ध, माताएँ एवं बहनें—सभी वर्गों के भक्त भगवान के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते रहे। हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि और भक्तों के प्रेममय नृत्य ने ऐसा अनुपम आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति का हृदय भक्ति रस में सराबोर हो गया।
अंततः भगवान श्री जगन्नाथ श्री अभय शर्मा जी के निवास स्थान पर पधारे, जहाँ परिवारजनों ने पुष्पवर्षा और मंगलध्वनियों के साथ प्रभु का भव्य स्वागत किया। वहाँ भगवान को विश्राम अर्पित किया गया तथा तत्पश्चात इस्कॉन के संचालक नकुलदास प्रभुजी ने मधुर हरिनाम संकीर्तन के उपरांत भक्तों को अत्यंत प्रेरणादायी कृष्ण कथा का श्रवण कराया।


अपने भावपूर्ण प्रवचन में प्रभुजी ने बताया कि इस संसार में मनुष्य जो कुछ भी अर्जित करता है, वह सब यहीं रह जाता है, किंतु भगवान की भक्ति, सेवा और सत्कर्म ही जीवात्मा की वास्तविक एवं शाश्वत संपत्ति हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं तो भगवान के नाम, रूप, लीला और सेवा में अपने जीवन को समर्पित करना होगा। प्रभुजी ने सभी भक्तों को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में सम्मिलित होकर दिव्य रस्सी खींचने का महत्व बताते हुए कहा कि यह महान आध्यात्मिक सौभाग्य जीव के अनेक जन्मों के पापों का नाश कर सकता है।


उन्होंने श्रील वैष्णव आचार्यों के वचनों का स्मरण कराते हुए कहा—
"कृष्ण तुष्टम् जगत तुष्टम्"
अर्थात जब भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं, तब सम्पूर्ण जगत अपने आप ही प्रसन्न और मंगलमय हो जाता है। इसलिए जीवन का वास्तविक लक्ष्य भगवान को प्रसन्न करना होना चाहिए।
प्रवचन सुनकर उपस्थित भक्तगण भावविभोर हो उठे। तत्पश्चात भव्य आरती सम्पन्न हुई, जिसमें सभी भक्तों ने नृत्य एवं कीर्तन के माध्यम से अपने प्रेम और समर्पण को भगवान के चरणों में अर्पित किया। सभी ने हाथ जोड़कर प्रभु से प्रार्थना की कि वे हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे आंतरिक शत्रुओं से बचाएँ तथा सदैव अपने चरणों की निष्काम प्रेममयी भक्ति सेवा में लगाए रखें।


इन मंगलमयी प्रार्थनाओं और हरिनाम संकीर्तन की दिव्य ध्वनियों के मध्य बीसवीं संध्या फेरी का सफल एवं शुभ समापन हुआ।
अंत में नकुलदास प्रभुजी ने नगरवासियों को संदेश देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में भगवान श्री जगन्नाथ अनेक अन्य क्षेत्रों में भी अपनी अहेतुकी कृपा बरसाने के लिए पधारेंगे। अतः सभी श्रद्धालु अपने घरों और हृदयों को प्रभु के स्वागत हेतु तैयार रखें तथा 19 जुलाई को आयोजित भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा में सम्मिलित होकर भगवान के रथ की रस्सी खींचने का दुर्लभ आध्यात्मिक सौभाग्य अवश्य प्राप्त करें।
भगवान श्री जगन्नाथ की कृपा से सम्पूर्ण नगर हरिनाम संकीर्तन से गुंजायमान हो, प्रत्येक घर मंदिर बने और प्रत्येक हृदय में कृष्ण प्रेम का दीपक प्रज्वलित हो — यही इस दिव्य रथयात्रा का संदेश है।

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