पंजाब की 40 यूनिवर्सिटियों के 80 विद्यार्थी अंतरधार्मिक सद्भावना दूत चुने गए: रमेश सिंह अरोड़ा
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- (Asia/Kolkata)
लाहौर (नजराना टाइम्स): पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के प्रांतीय मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि प्रांत की 40 यूनिवर्सिटियों से 80 विद्यार्थियों को अंतरधार्मिक विद्यार्थी दूत चुना गया है। ये विद्यार्थी अपने संस्थानों में शांति, सहनशीलता, आपसी सम्मान और विभिन्न धर्मों के बीच समझ बढ़ाने के लिए काम करेंगे।
वह पंजाब के मानवाधिकार एवं अल्पसंख्यक मामलों के विभाग द्वारा अंतरधार्मिक विद्यार्थी दूत कार्यक्रम के तहत आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। अरोड़ा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
परिसरों में संवाद और जागरूकता गतिविधियां
मंत्री ने कहा कि विद्यार्थी दूत जागरूकता सत्रों, रचनात्मक संवाद और परिसर आधारित गतिविधियों के माध्यम से अलग-अलग धार्मिक तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के बीच समझ मजबूत करेंगे।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में सहनशीलता, समानता, स्वीकार्यता और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना है। विभिन्न धर्मों के लोगों की आस्थाओं, मूल्यों और परंपराओं का सम्मान करना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

समावेशी समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका
अरोड़ा ने युवाओं को अंतरधार्मिक सद्भावना दूत के रूप में जोड़ने को शांतिपूर्ण, समावेशी और सहनशील समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ की सोच का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रांतीय सरकार ऐसा वातावरण बनाने के लिए काम कर रही है, जहां विविधता का सम्मान हो और युवाओं को सामाजिक एकता तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
अल्पसंख्यक दिवस पर शुरू हुआ था कार्यक्रम
मंत्री ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत 11 अगस्त 2026 को अल्पसंख्यक दिवस के अवसर पर की गई थी। चयनित विद्यार्थियों को प्रशिक्षण सहायता, प्रमाणपत्र और विशेष किट उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अपने संस्थानों में कार्यक्रम के उद्देश्यों को आगे बढ़ा सकें।
उन्होंने पूरे पंजाब में शांति, भाईचारा, समानता और अंतरधार्मिक सद्भाव बढ़ाने में युवाओं को शामिल करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सामाजिक बदलाव का नेतृत्व करने के लिए युवाओं को सशक्त बनाना जरूरी है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर मिल सकें।
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