एआई सामग्री की अनिवार्य पहचान और दुष्प्रचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समझौता हो: तारड़
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- (Asia/Kolkata)
इस्लामाबाद (नज़राना टाइम्स): पाकिस्तान के संघीय सूचना और प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तारड़ ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार सामग्री पर अनिवार्य पहचान-चिह्न लगाने, सोशल मीडिया मंचों की तथ्य-जांच मजबूत करने और पाकिस्तान में उनके स्थानीय कार्यालय खोलने की मांग की। उन्होंने गलत सूचना और जानबूझकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते का प्रस्ताव भी रखा।
तारड़ गुरुवार को अल्लामा इकबाल ओपन यूनिवर्सिटी में सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एसडीपीआई) की ओर से आयोजित चार दिवसीय सतत विकास सम्मेलन के समापन दिवस पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने “सत्योत्तर युग में विकास पर पुनर्विचार” विषयक पूर्ण सत्र में मुख्य भाषण दिया। सम्मेलन का केंद्रीय विषय व्यवधानों के दौर में विकास की दिशा पर पुनर्विचार करना था।

सूचना के चयन में एल्गोरिदम की बढ़ती भूमिका
सूचना मंत्री ने कहा कि लोगों तक कौन-सी जानकारी पहुंचेगी, इसका निर्धारण अब ऐसे एल्गोरिदम करते हैं जिनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की सहभागिता बढ़ाना है। उनके अनुसार, इनमें सूचना की सत्यता परखने की कोई अंतर्निहित व्यवस्था नहीं होती।
उन्होंने कहा कि वह सोशल मीडिया मंचों से एआई सामग्री की पहचान अनिवार्य करने का आग्रह करते रहे हैं। टिकटॉक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मंच ने ऐसी व्यवस्था शुरू की है। उन्होंने एक्स के ‘कम्युनिटी नोट्स’ फीचर का भी उल्लेख किया, जो पुरानी वीडियो को नई घटनाओं के रूप में पेश किए जाने की पहचान करने में मदद कर सकता है।
तारड़ ने कहा कि एआई सामग्री की पहचान के साथ नियामक और कानूनी ढांचा भी होना चाहिए। उन्होंने विज्ञापन और फिल्म निर्माण जैसे रचनात्मक क्षेत्रों के लिए एआई से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवीय योगदान आवश्यक बना हुआ है।
दुष्प्रचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय ढांचे का प्रस्ताव
मंत्री ने बताया कि सहयोगी देशों के हालिया दौरों के दौरान उन्होंने गलत सूचना और दुष्प्रचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समझौते का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने सदस्य देशों और एक अंतरराष्ट्रीय संस्था पर आधारित व्यवस्था की बात कही।
इलेक्ट्रॉनिक अपराध निवारण अधिनियम (पेका) पर तारड़ ने कहा कि इसका उद्देश्य साइबर और डिजिटल क्षेत्र में अपराध रोकना है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी नहीं लगाता और न ही पत्रकारों को अपना पेशेवर काम करने से रोकता है।
उन्होंने बताया कि नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनसीसीआईए) क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित कर रही है और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रही है। उनके मुताबिक, सोशल मीडिया विनियमन और संरक्षण प्राधिकरण भी बनाया जा चुका है तथा उसके अध्यक्ष की नियुक्ति हो गई है।
ऑनलाइन उत्पीड़न के पीड़ितों के लिए सहायता की जरूरत
तारड़ ने ऑनलाइन उत्पीड़न के पीड़ितों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श और सहायता की व्यवस्था का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं ऑनलाइन उत्पीड़न और ब्लैकमेल के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होती हैं। अपराधियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी सुनवाई और अभियोजन व्यवस्था की जरूरत है।
उन्होंने मानहानि संबंधी कानून मजबूत करने की भी मांग की, ताकि लोगों को ऐसे मुकदमे दायर करने के लिए विदेश न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि भविष्य में यह परिभाषित करने की जरूरत होगी कि किसे प्रसारक माना जाए।
जनता का भरोसा और सूचना का अधिकार सुरक्षित रहे: सुलेरी
अपने प्रारंभिक संबोधन में एसडीपीआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. आबिद कय्यूम सुलेरी ने कहा कि सम्मेलन में बाढ़, हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम, आपूर्ति मार्गों के बंद होने, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संबंधी चुनौतियों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति के रास्तों में व्यवधान का प्रतिकूल असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
सुलेरी ने कहा कि सूचना के क्षेत्र में पैदा हुए व्यवधानों का सामना पश्चिमी देशों ने भी किया है। उन्होंने अमेरिकी चुनावों के आसपास फैलाई गई मनगढ़ंत जानकारी का उदाहरण दिया।
मई के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारत में उनके मित्रों ने फोन करके पूछा था कि क्या “लाहौर का बंदरगाह” नष्ट हो गया है, जबकि लाहौर की समुद्र तक पहुंच ही नहीं है। उन्होंने कहा कि बाद में इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर कथित हमले के बारे में भी उनसे सवाल पूछे गए, जिनका आधार उसे जलता हुआ दिखाने का दावा करने वाली तस्वीरें थीं।
उन्होंने जोर दिया कि सरकारों को सूचना के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए जनता का भरोसा और अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए। गलत सूचना तथा तथ्यों की जानबूझकर या चुनिंदा प्रस्तुति रोकने के प्रयासों के साथ इन अधिकारों की सुरक्षा भी जरूरी है।
इस अवसर पर अल्लामा इकबाल ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नासिर जावेद और डॉ. सुलेरी ने सूचना मंत्री को स्मृति-चिह्न भेंट किया।

निर्यात बढ़ाने के लिए कर और वित्तपोषण सुधारों की योजना
इससे पहले निजी क्षेत्र के विकास और राजकोषीय नीति पर आयोजित सत्र में वित्त और राजस्व राज्य मंत्री बिलाल अजहर कयानी ने कहा कि सरकार कर नीति में सुधार, छोटे और मझोले उद्यमों की वित्त तक पहुंच बढ़ाने और निर्यात करने वाले कारोबारों को ऋण देने के लिए बैंकों को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य निर्यात वृद्धि तेज करना और पाकिस्तान को बार-बार आने वाले आर्थिक उछाल तथा मंदी के चक्र से बाहर निकालना है।
कयानी ने कहा कि कृषि तथा छोटे और मझोले उद्यमों को ऋण देने वाले बैंकों और इन क्षेत्रों को वित्त उपलब्ध कराने से हिचकिचाने वाले बैंकों के लिए अलग दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। उन्होंने निवेश, निर्यात और रोजगार सृजन के लिए नीतियों में पूर्वानुमेयता तथा कारोबार के अनुकूल कर व्यवस्था पर जोर दिया।
उन्होंने कारोबारी समुदाय और सरकार के बीच भरोसे की कमी स्वीकार की। उनके अनुसार, क्रियान्वयन की समस्याओं और संघीय व प्रांतीय संस्थाओं की अनेक नियामक आवश्यकताओं के कारण नीतिगत घोषणाएं अक्सर अपेक्षित परिणाम नहीं दे पातीं।
विदेश मंत्रालय में विशेष निवेश सुविधा परिषद और आर्थिक कूटनीति प्रभाग के अतिरिक्त सचिव, राजदूत अबरार एच. हाशमी ने कहा कि निवेश आकर्षित करने और उसे बनाए रखने के लिए केवल अवसरों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। निवेशकों का विश्वास, नीतिगत स्थिरता और नियमों में निरंतरता भी महत्वपूर्ण हैं।
कचरा संग्रह, छंटाई और पुनर्चक्रण व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) को प्रभावी ढंग से लागू करने पर आयोजित एक अन्य सत्र में जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री डॉ. शेज़रा मनसब अली खान खरल ने कचरा संग्रह, छंटाई और पुनर्चक्रण की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई।
उन्होंने अनौपचारिक कचरा संग्रह क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका स्वीकार की। साथ ही, अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों में प्लास्टिक संबंधी नियमों और उन्हें लागू करने के तरीकों में अंतर से पैदा होने वाली चुनौतियों का उल्लेख किया।
मंत्री ने एकल-उपयोग प्लास्टिक निषेध विनियम 2023 और ग्लोबल प्लास्टिक एक्शन पार्टनरशिप में पाकिस्तान की भागीदारी पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान 2022 में इस साझेदारी से जुड़ा था, जिसके तहत प्लास्टिक प्रदूषण घटाने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार की गई।
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