पूरे पाकिस्तान में अकीदत और शांति के साथ मनाया गया यौम-ए-आशूरा, देशभर से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं

पूरे पाकिस्तान में अकीदत और शांति के साथ मनाया गया यौम-ए-आशूरा, देशभर से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं

रिपोर्ट: अली इमरान चट्ठा | नज़राना टाइम्स

लाहौर | 26 जून 2026

पाकिस्तान भर में शुक्रवार को 10 मुहर्रम 1448 हिजरी (यौम-ए-आशूरा) अत्यंत श्रद्धा, अकीदत और ग़मगीन माहौल में मनाया गया। लाखों अज़ादारों ने हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) — जो हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के नवासे थे — तथा कर्बला के मैदान में लगभग 1,400 वर्ष पूर्व शहीद हुए उनके 72 परिजनों और साथियों की शहादत को याद करते हुए मजलिसों और मातमी जुलूसों में भाग लिया।

संघीय और प्रांतीय सरकारों द्वारा किए गए व्यापक सुरक्षा प्रबंधों तथा जनता के सहयोग के परिणामस्वरूप पंजाब, सिंध, ख़ैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद, आज़ाद कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरे देश में सभी जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। देश के किसी भी हिस्से से किसी अप्रिय घटना की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई।

देशभर में कुल 4,836 मातमी जुलूस और 5,480 मजलिसों का आयोजन किया गया, जबकि गृह मंत्रालय ने 1,301 स्थानों को अत्यधिक संवेदनशील घोषित किया था। सभी प्रांतीय सरकारों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों के साथ समन्वय कर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए। प्रमुख जुलूस मार्गों पर चिकित्सा शिविर, सबीलें (पानी वितरण केंद्र) तथा अन्य आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गईं।

गृह मंत्री मोहसिन नक़वी के निर्देश पर इस्लामाबाद में स्थापित केंद्रीय निगरानी कक्ष पूरे दिन प्रांतीय नियंत्रण कक्षों के साथ लगातार संपर्क में रहा। गृह मंत्री, राज्य मंत्री तलाल चौधरी तथा गृह सचिव खुर्रम आगा ने पल-पल स्थिति की निगरानी की।

राष्ट्रीय नेतृत्व के संदेश

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अपने संदेश में कहा कि यौम-ए-आशूरा ईमान, सब्र, कुर्बानी, सत्य, न्याय और सामाजिक सुधार का अमर संदेश देता है। उन्होंने देशवासियों से एकता, धार्मिक सहिष्णुता, सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने की अपील की तथा उलेमा, धार्मिक नेताओं, मीडिया और युवाओं से कर्बला के वास्तविक संदेश को समाज तक पहुँचाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने कहा कि कर्बला की त्रासदी मानवता के लिए यह संदेश है कि सत्य, न्याय, ईमानदारी और मानवीय गरिमा पर कभी समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने नागरिकों से शांति, भाईचारा और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने तथा अफवाहों और भड़काऊ गतिविधियों से दूर रहने की अपील की।

पंजाब - लाहौर का केंद्रीय जुलूस निसार हवेली से शुरू होकर मोहल्ला शियान से होता हुआ कर्बला गामे शाह पहुँचा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुरक्षा के लिए 20,000 से अधिक पुलिसकर्मी, ड्रोन, सेफ सिटी कैमरे और त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई।

रावलपिंडी में मुख्य जुलूस इमामबाड़ा आशिक हुसैन से प्रारंभ होकर इमामबाड़ा कदीमी तक पहुँचा। रास्ते में चार अन्य जुलूस भी इसमें शामिल हुए। यहाँ 5,500 पुलिसकर्मियों के साथ सेना और रेंजर्स भी तैनात रहे।

सुरक्षा के मद्देनज़र पंजाब के 24 जिलों में जुलूस मार्गों और मजलिस स्थलों पर रात 10 बजे तक मोबाइल सेवाएँ आंशिक रूप से निलंबित रहीं। पूरे प्रांत में 2,502 मजलिसें और 3,025 जुलूस आयोजित किए गए।

सिंध - कराची का मुख्य जुलूस निष्ठार पार्क से सुबह रवाना होकर अपने पारंपरिक मार्ग से गुजरते हुए खारादर स्थित इमामबाड़ा हुसैनिया ईरानियान पहुँचा। मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने स्वयं मातमी जुलूस में भाग लिया। पूरे प्रांत में 60,000 पुलिस और रेंजर्स कर्मियों की तैनाती की गई। मार्ग पर स्नाइपर तैनात रहे और बम निरोधक दस्तों ने पहले ही सुरक्षा जांच पूरी कर ली थी। सिंध में 1,040 मजलिसें और 1,039 जुलूस आयोजित हुए।

ख़ैबर पख्तूनख्व - पेशावर में पहला जुलूस इमामबाड़ा आगा सैयद अली शाह से निकला, जबकि दिनभर 12 अन्य जुलूस भी कड़ी सुरक्षा के बीच निकाले गए। सुरक्षा के लिए पाकिस्तान सेना की 61 तथा रेंजर्स की 76 कंपनियाँ तैनात की गईं। 30,000 से अधिक प्रशिक्षित स्वयंसेवकों ने भी सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग दिया।

पूरे प्रांत में एआई आधारित निगरानी प्रणाली, बॉडी कैमरे, जियो-टैग्ड वीडियो मॉनिटरिंग, 5,600 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 1,000 से अधिक 4जी इवेंट कैमरों का उपयोग किया गया। 614 इमामबाड़ों में से 127 को अत्यधिक संवेदनशील, 262 को संवेदनशील तथा 225 को सामान्य श्रेणी में रखा गया।

बलूचिस्तान -क्वेटा का केंद्रीय जुलूस सुबह आलमदार रोड स्थित इमामबाड़ा हुसैनी सादात से निकला और मग़रिब की नमाज़ के बाद तक जारी रहा। जुलूस में 35 मातमी दस्तों ने भाग लिया। मार्ग पर सबीलें, राहत शिविर और आपातकालीन सहायता केंद्र स्थापित किए गए। सुरक्षा के लिए 4,800 पुलिसकर्मियों तथा आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त 4,000 जवानों की तैनाती की गई।

इस्लामाबाद -राजधानी में 12 जुलूस और 54 मजलिसें आयोजित हुईं। पुलिस महानिरीक्षक सैयद अली नासिर रिज़वी ने स्वयं प्रमुख जुलूसों का निरीक्षण किया। इस्लामाबाद पुलिस, रेंजर्स, फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी और स्पेशल ब्रांच के कुल 16,000 कर्मियों को सुरक्षा ड्यूटी पर लगाया गया। 57 से अधिक सुरक्षा चौकियाँ बनाई गईं तथा महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया। ड्रोन, बॉडी कैमरों और सेफ सिटी प्रणाली के माध्यम से लगातार निगरानी की गई।

आज़ाद कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान
 कश्मीर में 47 मजलिसें और 41 जुलूस शांतिपूर्वक संपन्न हुए।
गिलगित-बाल्टिस्तान में 1,070 मजलिसें और 141 जुलूस आयोजित किए गए। गिलगित और स्कर्दू सहित पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा और चौबीसों घंटे सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था रही।

अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था

प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से संभावित खतरे और खुफिया एजेंसियों की पूर्व चेतावनियों को देखते हुए पूरे देश में अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किए गए। जुलूस मार्गों को शिपिंग कंटेनरों से सील किया गया तथा प्रत्येक सहभागी की तलाशी ली गई। ऊँची इमारतों पर स्नाइपर तैनात किए गए, जबकि हेलीकॉप्टरों, सीसीटीवी नेटवर्क और सेफ सिटी कैमरों से लगातार निगरानी रखी गई। संवेदनशील स्थानों पर एंटी-ड्रोन सिस्टम, मोबाइल जैमर, बम निरोधक दस्ते और सादे कपड़ों में सुरक्षा कर्मियों को भी तैनात किया गया। कई क्षेत्रों में डबल सवारी पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया।

अज़ादारों के लिए विशेष सुविधाएँ

प्रांतीय सरकारों ने प्रमुख जुलूस मार्गों पर चिकित्सा शिविर, ठंडे पानी की सबीलें और पेय पदार्थ वितरण केंद्र स्थापित किए। रावलपिंडी में रेस्क्यू 1122 की 57 एंबुलेंस तैनात की गईं तथा सरकारी और निजी अस्पतालों में 537 बिस्तर आपातकालीन स्थिति के लिए आरक्षित रखे गए। स्थानीय लोगों ने भी नज़र-नियाज़ के रूप में भोजन, दूध, शरबत, शीतल पेय और पानी का वितरण किया।

जुलूसों के समापन के बाद पूरे देश में शाम-ए-गरीबाँ की मजलिसें आयोजित की गईं, जिनमें कर्बला की घटना के बाद के घटनाक्रम का वर्णन किया गया।

यौम-ए-आशूरा का पूरे पाकिस्तान में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होना इस बात का प्रमाण है कि संघीय सरकार, प्रांतीय प्रशासन, सुरक्षा बलों और आम जनता के प्रभावी समन्वय ने एक बार फिर राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और धार्मिक गरिमा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत किया है।

Ali Imran Chattha
Ali Imran Chattha
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