सामूहिक अध्ययन ज्ञान और दावत-ए-दीन की मजबूत नींव: डॉ. हुमैरा तारिक
- इंटरनेशनल
- 02 Jul, 2026 04:41 PM (Asia/Kolkata)
सामूहिक अध्ययन ज्ञान, जागरूकता और दावत-ए-दीन की मजबूत नींव है: डॉ. हुमैरा तारिक
लाहौर (नज़राना टाइम्स) अली इमरान चठ्ठा
जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान महिला विंग की महासचिव डॉ. हुमैरा तारिक ने मंसूरा ऑडिटोरियम में आयोजित स्टडी सर्किल कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि स्टडी सर्किल केवल शैक्षणिक बैठकें नहीं हैं, बल्कि कुरआन की समझ, बौद्धिक प्रशिक्षण, व्यक्तित्व निर्माण, सामूहिक जागरूकता और दावत-ए-दीन का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि यदि अध्ययन सही पद्धति और सामूहिक वातावरण में किया जाए तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी, स्थायी और फलदायी बन जाती है।
डॉ. हुमैरा तारिक ने कहा कि सामूहिक अध्ययन से व्यक्ति में आत्मविश्वास, उत्साह और निरंतरता पैदा होती है। उन्होंने रमज़ान का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार सामूहिक माहौल में इबादत आसान और आनंददायक हो जाती है, उसी प्रकार समूह में अध्ययन भी अधिक प्रभावी और सुखद बन जाता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में सामूहिक अध्ययन के अनेक सफल उदाहरण मौजूद हैं, जहाँ शोध सामग्री को प्रतिभागियों में विभाजित कर कम समय में पूरे समूह तक पहुँचाया जाता है। उन्होंने बताया कि मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में कम सफलता का एक बड़ा कारण अकेले अध्ययन करना है, जबकि समूह में पढ़ने से रुचि और पाठ्यक्रम पूरा करने की दर दोनों बढ़ जाती हैं।
उन्होंने कहा कि स्टडी सर्किल केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आपसी संबंधों, सहयोग, दावत के अवसरों और सामूहिक प्रगति की मजबूत नींव भी हैं। उनके अनुसार अल्लाह के दीन को समझने, उस पर अमल करने और समाज में स्थापित करने के लिए सामूहिकता अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. हुमैरा तारिक ने अध्ययन की प्रसिद्ध SQ3R पद्धति (सर्वे, प्रश्न, पढ़ना, दोहराना और पुनरावलोकन) को स्टडी सर्किल का आधार बताते हुए कहा कि यह तरीका सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाता है। उन्होंने कहा कि प्रश्न पूछना बुद्धिमत्ता की निशानी है और ऐसा वातावरण होना चाहिए जहाँ हर प्रतिभागी खुलकर सवाल पूछ सके और सक्रिय रूप से सीखने में भाग ले।

इसके बाद “हर दिल कुरआन” परियोजना की निदेशक अनीला महमूद ने दौरा-ए-कुरआन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पवित्र कुरआन के अवतरण के वास्तविक उद्देश्य को समझना तथा जीवन के हर क्षेत्र में कुरआन से मार्गदर्शन प्राप्त करना है। कुरआन की समझ बढ़ाना, उसकी शिक्षाओं को व्यवहार में लागू करना, सामूहिक अनुशासन विकसित करना, दावत की क्षमता बढ़ाना और चरित्र निर्माण इस कार्यक्रम के प्रमुख लक्ष्य हैं।
उन्होंने बताया कि दौरा-ए-कुरआन को दो घंटे के एक व्यापक पाठ्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें कुरआन का तर्जुमा सहित पाठ, विषयगत चर्चा, व्यावहारिक प्रतिक्रिया और भविष्य की कार्ययोजना शामिल है, ताकि कुरआन का संदेश केवल समझा ही न जाए, बल्कि जीवन में अपनाया भी जाए।
कार्यशाला के अंत में लाहौर हल्के की नाज़िमा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे कार्यशाला में दी गई आधुनिक अध्ययन विधियों, स्टडी सर्किल के व्यावहारिक सिद्धांतों और दौरा-ए-कुरआन की तैयारियों को अपने संगठनात्मक और दावती कार्यों का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि नियमित तैयारी, व्यावहारिक अभ्यास, सामूहिक अध्ययन और निरंतर मार्गदर्शन ही सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करते हैं।
कार्यशाला में लाहौर हल्के से बड़ी संख्या में सदस्याओं और इच्छुक प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा स्टडी सर्किल को अधिक प्रभावी, सक्रिय और उपयोगी बनाने संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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