कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा की बेअदबी संबंधी कानून पर टिप्पणी अस्पष्ट और भ्रमित करने वाली

कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा की बेअदबी संबंधी कानून पर टिप्पणी अस्पष्ट और भ्रमित करने वाली

Amritsar 11 April , Nazrana Times - शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब कैबिनेट द्वारा “जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल 2026” को मंजूरी दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा मीडिया के साथ साझा की गई जानकारी स्पष्ट नहीं है और भ्रम पैदा करने वाली है।
जारी बयान में एडवोकेट धामी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि स्वयं कैबिनेट मंत्री को भी प्रस्तावित बिल के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि एक ओर मंत्री इसे पूरी तरह नया बिल बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर इसका नाम “जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल 2026” रखा गया है। उन्होंने कहा कि “जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008” श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छपाई से संबंधित है, ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या सरकार मौजूदा कानून में संशोधन करना चाहती है या फिर बेअदबी की घटनाओं को लेकर कोई नया कानून लाना चाहती है। इस अस्पष्टता के कारण सिख समुदाय में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
एडवोकेट धामी ने आगे कहा कि मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा SGPC के संबंध में की गई टिप्पणियां तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि SGPC द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय कमेटी ने सरकार की सेलेक्ट कमेटी और राज्य सरकार से कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि SGPC द्वारा समय-समय पर लिखे गए पत्र हाल ही में मीडिया के साथ भी साझा किए गए हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़ा यह मुद्दा सिख भावनाओं से गहराई से संबंधित है, लेकिन सरकार इसकी गंभीरता को समझने में विफल रही है। उनके अनुसार, सरकार का रवैया यह दर्शाता है कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रही है, जो उसके बयानों से स्पष्ट होता है।
एडवोकेट धामी ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि मीडिया को जानकारी देने के लिए नियुक्त मंत्री केवल तैयार किया गया बयान पढ़ रहे हैं, क्योंकि यदि उन्हें पूरी जानकारी होती तो वे इसे कभी संशोधन और कभी नया बिल बताकर भ्रम पैदा नहीं करते।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्टता की कमी के कारण अब सिख संस्थाएं और संगठन यह मांग कर रहे हैं कि बिल का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाए।

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