पंजाब में आतंकवाद से निपटने के लिए मजबूत विधायी निगरानी और संस्थागत समन्वय की मांग
- इंटरनेशनल
- (Asia/Kolkata)
लाहौर, 2 सितंबर — नज़्राना टाइम्स अली इमरान चठ्ठा
पंजाब में सांसदों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद से निपटने के लिए मजबूत विधायी निगरानी, बेहतर संस्थागत समन्वय और रोकथाम पर केंद्रित उपायों में अधिक निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया है।
पंजाब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन काउंटरिंग वायलेंट एक्सट्रीमिज्म (CoE-CVE), गृह विभाग द्वारा पंजाब में आतंकवाद-रोधी और हिंसक उग्रवाद की रोकथाम के लिए विधायी भागीदारी तथा संस्थागत समन्वय को मजबूत करने के विषय पर सांसदों के साथ एक प्रांतीय नीति संवाद आयोजित किया गया। ब्रिटिश हाई कमीशन और सस्टेनेबल सोशल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने इस नीति संवाद में सहयोगी भागीदार के रूप में हिस्सा लिया।
नीति संवाद की अध्यक्षता कैबिनेट की कानून एवं व्यवस्था संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष ख्वाजा सलमान रफीक ने की। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की रोकथाम के लिए समन्वित, समावेशी और टिकाऊ दृष्टिकोण अपनाने की प्रांतीय सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
रफीक ने कहा कि परामर्श के दौरान सामने आई सिफारिशें भविष्य के नीतिगत सुधारों, मजबूत संसदीय निगरानी तंत्र और प्रांतीय तथा संघीय संस्थाओं के बीच बेहतर सहयोग में योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पिछली पीढ़ियों के बलिदानों का परिणाम है और देश के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
रफीक ने समाज में उग्रवाद से निपटने में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर काउंटरिंग वायलेंट एक्सट्रीमिज्म की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने नदी किनारे स्थित कच्चा क्षेत्रों में शांति बहाल की है और वहां विकास के लिए 22 अरब रुपये का बजट आवंटित किया है।
उन्होंने कहा कि शांति स्थापित करने के लिए धार्मिक विद्वानों, सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं और समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि 70,000 मस्जिदों के पंजीकरण का श्रेय गृह विभाग को जाता है।
मुख्य संबोधन देते हुए पंजाब के गृह सचिव डॉ. अहमद जावेद काजी ने कहा कि प्रांतीय सरकार समन्वित नीतिगत क्रियान्वयन, बेहतर खुफिया जानकारी साझा करने और संबंधित संस्थाओं के बीच मजबूत सहयोग के माध्यम से सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि जनता के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। काजी के अनुसार, अंतर-प्रांतीय सीमाओं से लगे जिलों में संयुक्त चेक पोस्ट के माध्यम से निगरानी को मजबूत किया गया है।
गृह सचिव ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार 70,000 इमामों को सम्मानजनक तरीके से मानदेय प्रदान कर रही है। उन्होंने आतंकवाद-रोधी और हिंसक उग्रवाद की रोकथाम से जुड़ी प्रभावी पहलों के लिए विधायी समर्थन को महत्वपूर्ण बताया।
तकनीकी सत्र के दौरान पंजाब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन काउंटरिंग वायलेंट एक्सट्रीमिज्म के मुख्य समन्वय अधिकारी गुलाम सगीर शाहिद ने केंद्र के दायित्वों पर प्रकाश डाला। इनमें शोध, जागरूकता एवं वकालत कार्यक्रम तथा रणनीतिक संचार के माध्यम से हिंसक उग्रवाद से निपटना शामिल है।
नीति संवाद में पंजाब विधानसभा के सदस्यों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों, नीति विशेषज्ञों और विकास भागीदारों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के प्रति पंजाब की रोकथाम-आधारित तथा संस्थागत प्रतिक्रिया को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। वक्ताओं ने विधायी निगरानी, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और संस्थागत समन्वय में सांसदों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि टिकाऊ शांति के लिए नीति निर्माताओं, सुरक्षा संस्थानों, अकादमिक क्षेत्र, नागरिक समाज और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच सहयोग आवश्यक है।
एक संवादात्मक सत्र में मौजूदा समन्वय तंत्र, विधायी कमियों और आतंकवाद-रोधी तथा हिंसक उग्रवाद की रोकथाम संबंधी नीतियों पर संसदीय निगरानी को मजबूत करने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रतिभागियों ने विधायकों और सुरक्षा संस्थानों के बीच नियमित संवाद, स्थायी समितियों के माध्यम से मजबूत निगरानी, रोकथाम-केंद्रित पहलों में अधिक निवेश, रणनीतिक संचार, सामुदायिक मजबूती और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
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