पाकिस्तान ने PCA फैसले को बड़ी कानूनी और कूटनीतिक जीत बताया
- इंटरनेशनल
- 17 May, 2026 06:24 PM (Asia/Kolkata)
इस्लामाबाद — 17 मई 2026 अली इमरान चठ्ठा
पाकिस्तान ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के नए पूरक फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी और कूटनीतिक जीत बताया है। पाकिस्तान के अनुसार, इस फैसले ने भारत की सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों के जल प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता पर “महत्वपूर्ण सीमाएँ” लगा दी हैं।
यह फैसला पिछले वर्ष 8 अगस्त 2025 को दिए गए PCA के बाध्यकारी निर्णय के बाद भारत के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है। भारत लगातार इस न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र को खारिज करता रहा है और हाल ही में इसे “पाकिस्तान के कहने पर किया गया एक नाटक” बताया।
ताज़ा फैसला “मैक्सिमम पॉन्डेज” यानी जलविद्युत परियोजनाओं में अस्थायी रूप से जमा किए जाने वाले पानी की मात्रा से संबंधित था। पाकिस्तान का कहना था कि भारत किशनगंगा और रतले परियोजनाओं में वास्तविक जरूरत से अधिक जल भंडारण क्षमता दिखाकर संधि की भावना का उल्लंघन कर रहा है।
न्यायाधिकरण ने पाकिस्तान के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि जल भंडारण की गणना वास्तविक नदी प्रवाह, टर्बाइन की जरूरत और निचले क्षेत्रों की आवश्यकताओं के आधार पर होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि “पॉन्डेज” को रणनीतिक जल भंडारण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि यह फैसला केवल औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की भारतीय परियोजनाओं के डिजाइन और योजना पर सीधे लागू होगा।
भारत ने फैसले को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह न्यायाधिकरण “अवैध रूप से गठित” है और इसके सभी निर्णय “शून्य और अमान्य” हैं। भारत का कहना है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के कारण उसने सिंधु जल संधि को स्थगित किया है, जबकि पाकिस्तान इन आरोपों को अस्वीकार करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पाकिस्तान की कानूनी स्थिति को मजबूत करता है, लेकिन इसके लागू होने की कोई प्रत्यक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था मौजूद नहीं है। इस कारण यह विवाद अभी भी रणनीतिक गतिरोध की स्थिति में बना हुआ है।
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