सिंधु जल संधि: लाहौर संवाद में पाकिस्तान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर
- इंटरनेशनल
- (Asia/Kolkata)
लाहौर (नज़राना टाइम्स): यूनिवर्सिटी ऑफ लाहौर में आयोजित राष्ट्रीय संवाद में वक्ताओं ने सिंधु जल संधि से संबंधित भारत के एकतरफा कदम के बाद पाकिस्तान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए समन्वित कानूनी और कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने राष्ट्रीय सहमति, प्रांतों के बीच समन्वय और बेहतर जल प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
संवाद में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं, सांसदों, कानूनी विशेषज्ञों, जल क्षेत्र के अधिकारियों, शिक्षाविदों और पत्रकारों ने भाग लिया। चर्चा में संधि की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति, भारत के कदम, क्षेत्रीय कूटनीति, जलवायु संबंधी चुनौतियां और पाकिस्तान की बढ़ती जल आवश्यकताएं शामिल रहीं।
प्रतिभागियों में पंजाब विधानसभा अध्यक्ष मलिक मुहम्मद अहमद खान, पीपीपी सिंध के अध्यक्ष सीनेटर निसार अहमद खुहरो, अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान, वापडा के पूर्व अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त मुजम्मिल हुसैन, सिंधु जल आयुक्त सैयद मेहर अली शाह, मोहसिन लेघारी और वरिष्ठ पत्रकार सोहेल वराइच सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल थे।

पंजाब और सिंध मिलकर बनाएं रणनीति
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष मलिक मुहम्मद अहमद खान ने कहा कि भारत के एकतरफा कदम से संधि से जुड़ी परिस्थितियों में बुनियादी बदलाव आया है। उन्होंने पंजाब और सिंध के राजनीतिक प्रतिनिधियों से अपने मतभेद बातचीत के माध्यम से सुलझाने और राष्ट्रीय जल हितों की रक्षा के लिए संयुक्त रणनीति बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और रक्षा से समझौता नहीं करेगा।
कानूनी और संस्थागत तैयारी पर जोर
अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान ने सिंधु जल संधि के कानूनी पहलुओं की जानकारी दी और बदलती परिस्थितियों में संभावित रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने प्रभावी कानूनी और संस्थागत उपायों का महत्व बताया।
सिंधु जल आयुक्त सैयद मेहर अली शाह ने कहा कि बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों और भारत के एकतरफा कदम ने नई कूटनीतिक तथा राजनीतिक चुनौतियां पैदा की हैं। उन्होंने पाकिस्तान के हितों की रक्षा और सिंचाई क्षमता मजबूत करने के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत बताई।
निचले इलाकों की चिंताओं पर ध्यान देने की मांग
सीनेटर निसार अहमद खुहरो ने कहा कि पानी के वितरण में निचले प्रवाह वाले क्षेत्रों, विशेषकर सिंध, की चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने घटते जल प्रवाह, समुद्री पानी के भीतर तक आने और प्रांत की जल आवश्यकताओं से जुड़ी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं होने का मुद्दा उठाया।
सिंध के विश्वविद्यालय एवं बोर्ड मंत्री मुहम्मद इस्माइल राहू ने कहा कि निचले क्षेत्रों की ओर पानी का प्रवाह घटने से गंभीर पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियां पैदा हो रही हैं। उन्होंने समुद्री पानी की घुसपैठ, कृषि भूमि के नुकसान और फसलों के लिए पानी की घटती उपलब्धता का उल्लेख करते हुए तटीय समुदायों के लिए बढ़ते जोखिमों की चेतावनी दी।
जल भंडारण और संसाधनों के कुशल उपयोग की जरूरत
वापडा के पूर्व अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त मुजम्मिल हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान के दृष्टिकोण से भारत ने पहले भी ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे संधि की प्रभावशीलता कमजोर हुई। उन्होंने साथ ही कहा कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक जल चुनौतियों का समाधान भी करना होगा।
उन्होंने जल भंडारण क्षमता बढ़ाने, पानी के कुशल उपयोग और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया।
इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (इरसा) में पंजाब के सदस्य अमजद सईद ने पाकिस्तान की नदी प्रणाली, संधि की संरचना और जल वितरण तंत्र की जानकारी दी। उन्होंने प्रांतों के बीच न्यायसंगत आवंटन को महत्वपूर्ण बताया।
चिनाब और जल ढांचे पर चर्चा
पूर्व सीनेटर और पंजाब के पूर्व सिंचाई मंत्री मोहसिन लेघारी ने जल प्रदूषण से संबंधित संधि के प्रावधानों पर विचार रखे। उन्होंने कृषि के लिए नियमित और भरोसेमंद जल आपूर्ति बनाए रखने की जरूरत बताई।
वापडा के सलाहकार शाहिद हमीद ने ऊपरी प्रवाह में संभावित जल हस्तक्षेप के संदर्भ में चिनाब को विशेष रूप से संवेदनशील नदी बताया। उन्होंने संभावित जोखिमों से निपटने के लिए प्रस्तावित जल भंडारण और बुनियादी ढांचे के उपायों पर चर्चा की।

बातचीत और क्षेत्रीय सहयोग का आह्वान
वरिष्ठ पत्रकार सोहेल वराइच ने संधि को उपमहाद्वीप में विश्वास बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था बताया और विवादों के समाधान के लिए बातचीत का आह्वान किया। उन्होंने लोकतंत्र, व्यापार और आर्थिक सहयोग पर क्षेत्रीय तनाव के व्यापक प्रभावों का भी उल्लेख किया।
पानी और बिजली मामलों के पूर्व संघीय सचिव इरफान अली ने कहा कि पाकिस्तान संधि से पीछे हटने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने क्षेत्रीय जल चिंताओं से निपटने के लिए चीन के साथ सहयोग सहित कूटनीतिक संपर्क मजबूत करने की जरूरत बताई।
एकीकृत राष्ट्रीय जल रणनीति की मांग
संवाद का समापन प्रभावी कूटनीति, कानूनी तैयारी, संघीय और प्रांतीय समन्वय, जलाशयों के निर्माण, पर्यावरण संरक्षण तथा पानी के कुशल उपयोग पर आधारित एकीकृत राष्ट्रीय रणनीति के आह्वान के साथ हुआ।
वक्ताओं ने कहा कि जल संसाधनों की रक्षा पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
रिपोर्ट: अली इमरान चट्ठा
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