निरंजन नगर बना वृंदावन धाम, भगवान श्री जगन्नाथ की 18वीं संध्या फेरी में उमड़ा भक्ति का सागर

निरंजन नगर बना वृंदावन धाम, भगवान श्री जगन्नाथ की 18वीं संध्या फेरी में उमड़ा भक्ति का सागर

कपूरथला 18जून गौरव मढिया

कलियुग के पतित-पावन, करुणासागर एवं भक्तवत्सल भगवान श्री जगन्नाथ देव की असीम कृपा इन दिनों सम्पूर्ण कपूरथला नगर पर बरस रही है। आगामी श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के उपलक्ष्य में इस्कॉन कपूरथला द्वारा आयोजित 45 दिव्य संध्या फेरियों का क्रम अत्यंत उत्साह एवं श्रद्धा के साथ चल रहा है। इन संध्या फेरियों के माध्यम से भगवान श्री जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों के द्वार पर पहुंचकर उन्हें दर्शन देकर कृतार्थ कर रहे हैं तथा हरिनाम संकीर्तन के द्वारा सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर रहे हैं।

गत दिवस 17 जून को भगवान श्री जगन्नाथ जी की 18वीं संध्या फेरी सीनपूरा एवं निरंजन नगर क्षेत्र में अत्यंत भव्य एवं दिव्य वातावरण में सम्पन्न हुई। भगवान के आगमन से सम्पूर्ण क्षेत्र मानो वृंदावन धाम में परिवर्तित हो गया। हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि, भक्तों का उत्साह, पुष्पवर्षा, दीपमालाएं और भगवान के प्रति उमड़ता प्रेम देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं भक्तिरस की गंगा प्रवाहित हो रही हो।

संध्या फेरी का शुभारम्भ सौभाग्यशाली श्रीमती गीता जी एवं श्री रविन्द्र जी के निवास स्थान से हुआ। क्षेत्रवासियों ने भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव जी एवं सुभद्रा महारानी का बड़े प्रेम एवं श्रद्धा के साथ स्वागत किया। अनेक भक्तों ने अपने घरों के बाहर सुंदर रंगोलियां सजाईं, दीप प्रज्ज्वलित किए तथा पुष्पवर्षा कर भगवान का अभिनंदन किया। भक्त परिवारों द्वारा विविध प्रकार के व्यंजन एवं भोग अर्पित कर भगवान का सुस्वागत किया गया।

ज्यों-ज्यों संकीर्तन यात्रा आगे बढ़ती गई, त्यों-त्यों भक्तों का उत्साह भी बढ़ता गया। इस्कॉन भक्तों द्वारा गाए गए मधुर भजन एवं हरिनाम संकीर्तन ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया। बच्चे, युवा, महिलाएं एवं बुजुर्ग सभी भगवान जगन्नाथ के प्रेम में झूमते और नृत्य करते दिखाई दिए। निरंजन नगर की गलियां “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे” के दिव्य महामंत्र से गूंज उठीं।

अनेक भक्तों की सेवाओं को स्वीकार करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ अंततः श्री सन्नी गुलाटी जी एवं श्रीमती नेहा गुलाटी जी के निवास स्थान पर पधारे, जहां भगवान की भव्य महाआरती सम्पन्न हुई। परिवारजनों एवं क्षेत्रवासियों ने दीपों, पुष्पों और हरिनाम संकीर्तन के मध्य भगवान की आरती कर दिव्य आनंद का अनुभव किया। तत्पश्चात भगवान की दिव्य लीलाओं एवं महिमा का रसपूर्ण श्रवण कराया गया।

इस अवसर पर इस्कॉन कपूरथला के संचालक नकुल दास प्रभुजी ने भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान प्रत्येक जीव के हृदय में परमात्मा रूप से विराजमान हैं। उनसे कुछ भी छिपा नहीं है। वे अपने भक्तों की प्रत्येक भावना, प्रत्येक प्रार्थना और प्रत्येक सेवा को जानते हैं तथा उन पर अकारण कृपा बरसाते हैं। भगवान अपने भक्त को केवल वही नहीं देते जिसकी वह कामना करता है, बल्कि उससे कहीं अधिक प्रदान करते हैं जिससे उसका आध्यात्मिक जीवन उन्नत हो सके।

प्रभुजी ने आगे बताया कि भगवान श्री जगन्नाथ, श्रीकृष्ण का वह अद्भुत स्वरूप हैं जो अपने भक्तों के प्रेम और विरह में द्रवित होकर प्रकट हुए हैं। उनकी विशाल, गोल एवं पलकरहित नेत्र इस बात के प्रतीक हैं कि वे निरंतर अपने भक्तों पर कृपादृष्टि बनाए रखते हैं। वे दसों दिशाओं में अपनी प्रेममयी दृष्टि फैलाकर प्रत्येक जीव की सेवा और भावना को स्वीकार करते हैं।

उन्होंने कहा कि रथयात्रा की रस्सी भी भगवान के प्रेम का ही प्रतीक है। जब भक्त उस रस्सी को खींचते हैं, तब वे वास्तव में भगवान को अपने हृदयरूपी वृंदावन में आमंत्रित करते हैं। यही रथयात्रा और संध्या फेरियों का गूढ़ आध्यात्मिक संदेश है।

भगवान श्री जगन्नाथ की इस 18वीं संध्या फेरी में उपस्थित भक्तों ने प्रभु की असीम कृपा का अनुभव किया। नगरवासी स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मान रहे हैं कि उन्हें इस कलियुग में भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन, हरिनाम संकीर्तन के श्रवण तथा वैष्णवों के संग का अमूल्य अवसर प्राप्त हो रहा है। वास्तव में भगवान श्री जगन्नाथ की यह अकारण करुणा ही है कि वे स्वयं भक्तों के घर-घर जाकर उन्हें भक्ति, आनंद और आध्यात्मिक जीवन का अमूल्य उपहार प्रदान कर रहे हैं।

इस्कॉन कपूरथला द्वारा आयोजित यह दिव्य संध्या फेरी केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज को भगवान के पवित्र नाम, प्रेम और भक्ति से जोड़ने वाला एक महान आध्यात्मिक अभियान है। भगवान श्री जगन्नाथ की कृपा से सम्पूर्ण नगर हरिनाममय हो रहा है और प्रत्येक हृदय में भक्ति का दीप प्रज्ज्वलित हो रहा है।

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