विरासत की रक्षा केवल समाचार नहीं, हमारी पत्रकारिता की जिम्मेदारी है

विरासत की रक्षा केवल समाचार नहीं, हमारी पत्रकारिता की जिम्मेदारी है

संपादकीय

विरासत की रक्षा केवल समाचार नहीं, हमारी पत्रकारिता की जिम्मेदारी है


✍️ ताजीमनूर कौर
संपादक, नज़राना टाइम्स
किसी भी मीडिया संस्थान के लिए सबसे बड़ा सम्मान पुरस्कारों या प्रशंसा-पत्रों से नहीं, बल्कि उस विश्वास से मापा जाता है जो समाज और संस्थाएँ उसकी पत्रकारिता पर करती हैं। जैन हेरिटेज फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा नज़राना टाइम्स के पाकिस्तान ब्यूरो प्रमुख एवं शोध लेखक अली इमरान चट्ठा को भेजा गया धन्यवाद-पत्र हमारे लिए केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि उस पत्रकारिता की दिशा की पुष्टि है जिसे नज़राना टाइम्स ने हमेशा अपना धर्म माना है।
पिछले कई वर्षों से नज़राना टाइम्स ने पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक जैन मंदिरों, गुरुद्वारों, हिंदू मंदिरों, सूफी दरगाहों तथा अन्य धार्मिक विरासत स्थलों की वास्तविक स्थिति को निष्पक्ष, तथ्यपरक और शोध-आधारित पत्रकारिता के माध्यम से दुनिया के सामने रखा है। हमारा उद्देश्य कभी भी सनसनी फैलाना नहीं रहा, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक विरासत की ओर ध्यान आकर्षित करना रहा है जो किसी एक देश या धर्म की नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की साझी धरोहर है।
जैन हेरिटेज फाउंडेशन ने अपने पत्र में स्वीकार किया है कि नज़राना टाइम्स की निरंतर और तथ्यपरक रिपोर्टिंग ने पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक जैन धार्मिक स्थलों की जर्जर स्थिति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। फाउंडेशन के अनुसार इस जागरूकता ने सरकारी स्तर पर संरक्षण, मरम्मत और पुनर्स्थापन की दिशा में पहल को भी प्रोत्साहित किया। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारी पत्रकारिता को एक जिम्मेदार और रचनात्मक भूमिका के रूप में स्वीकार किया गया है।
आज के दौर में, जब मीडिया का बड़ा हिस्सा केवल तात्कालिक सुर्खियों और विवादों की दौड़ में लगा हुआ है, तब इतिहास, संस्कृति और विरासत से जुड़ी खबरें अक्सर पीछे छूट जाती हैं। लेकिन नज़राना टाइम्स का दृढ़ विश्वास है कि यदि हम अपनी साझा ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने में असफल रहे, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल इमारतें ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी खो देंगी।
हम मानते हैं कि एक पत्रकार का कार्य केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग करना नहीं, बल्कि उन मुद्दों को भी समाज के सामने लाना है जो मानवता, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी समाचार के परिणामस्वरूप कोई ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पुनः संरक्षित होता है, किसी विरासत स्मारक को नया जीवन मिलता है या किसी समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित होती है, तो यह पत्रकारिता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।
नज़राना टाइम्स की ओर से हम जैन हेरिटेज फाउंडेशन, नई दिल्ली का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने हमारी पत्रकारिता को सम्मान दिया और हमारे प्रयासों की सराहना की। यह सम्मान हमारी पूरी संपादकीय टीम, हमारे पाकिस्तान ब्यूरो और विशेष रूप से अली इमरान चट्ठा की समर्पित, शोध-आधारित और जिम्मेदार पत्रकारिता को समर्पित है।
हम यह भी विश्वास दिलाते हैं कि नज़राना टाइम्स भविष्य में भी धर्म, जाति, देश और सीमाओं से ऊपर उठकर ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत के संरक्षण से जुड़े हर सकारात्मक प्रयास का पूरा सहयोग करेगा। जहाँ भी साझा विरासत की रक्षा का प्रश्न उठेगा, वहाँ नज़राना टाइम्स अपनी कलम, अपने कैमरे और सत्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ उपस्थित रहेगा।
हमारा दृढ़ विश्वास है कि विरासत की रक्षा किसी एक धर्म की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा जिम्मेदारी है। मीडिया का दायित्व केवल समाचार देना नहीं, बल्कि उन मूल्यों की रक्षा करना भी है जो समाज को जोड़ते हैं। यही नज़राना टाइम्स की संपादकीय नीति है और यही हमारा भविष्य का संकल्प भी रहेगा।

ताजीमनूर कौर
संपादक
नज़राना टाइम्स

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