भारतीय यात्री सरबजीत कौर ने भारत लौटने से किया इनकार, निर्वासन प्रक्रिया शुरू लेकिन अस्थायी रूप से रोकी गई
- इंटरनेशनल
- 05 Jan, 2026 06:57 PM (Asia/Kolkata)
लाहौर / वाघा बॉर्डर – 5 जनवरी 2026 अली इमरान चठ्ठा
भारतीय यात्री सरबजीत कौर (जिन्होंने इस्लाम कबूल करने और नासिर हुसैन से विवाह के बाद नाम नूर हुसैन रखा) को पाकिस्तानी संघीय इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। उन्हें 4 जनवरी 2026 को ननकाना साहिब के पास गांव पिहरे वाली से इंटेलिजेंस ब्यूरो और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था।
वर्तमान स्थिति
52 वर्षीय सरबजीत कौर, जो भारतीय पंजाब के कपूरथला ज़िले के अमानीपुर गांव की निवासी हैं, फिलहाल संघीय इमिग्रेशन अधिकारियों की हिरासत में हैं। उनका एकल-प्रवेश धार्मिक वीज़ा 14 नवंबर 2025 को समाप्त हो गया था, जिसके चलते वाघा–अटारी सीमा के रास्ते भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
हालांकि, आगे की जांच और कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने तक तत्काल निर्वासन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
भारत लौटने से इनकार
सरबजीत कौर ने स्वेच्छा से भारत लौटने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम स्वीकार किया और 5 नवंबर 2025 को नासिर हुसैन से निकाह किया। उन्होंने दावा किया है कि भारत में उनकी सुरक्षा को खतरा है और मौजूदा सरकार के तहत मुसलमानों के लिए हालात सुरक्षित नहीं हैं। इस संबंध में उनका वीडियो बयान और निकाहनामा भी सामने आया है।
निर्वासन की संभावित समय-सीमा
रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें संभावित हस्तांतरण के लिए वाघा बॉर्डर क्षेत्र की ओर ले जाया गया है। फ्लैग मीटिंग और सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद 6 जनवरी 2026 की सुबह या उसके बाद किसी भी समय निर्वासन हो सकता है। फिलहाल सीमा पार किए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महेंद्र पाल सिंह का बयान
पीटीआई नेता और पंजाब विधानसभा के पूर्व सदस्य महेंद्र पाल सिंह, जिन्होंने इस मामले में लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, ने निर्वासन प्रक्रिया शुरू होने को “कानून की जीत” बताया है। वे वीज़ा उल्लंघन, सुरक्षा पहलुओं और लंबे समय तक ठहराव की परिस्थितियों की पूरी और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर एक बड़े सिख जत्थे के साथ पाकिस्तान आई थीं। 5 नवंबर को उन्होंने इस्लाम स्वीकार किया, नासिर हुसैन से विवाह किया और जत्थे से अलग हो गईं। 13 नवंबर को जत्था भारत लौट गया, लेकिन वह पाकिस्तान में ही रहीं।
मामले की जांच संघीय इमिग्रेशन अधिकारियों, ईटीपीबी और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा जारी है। स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले समय में और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
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