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पाकिस्तान में महंगाई बढ़ने की आशंका: IMF ने मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 9.9 प्रतिशत किया

13 Oct, 2026 04:41 PM

आर्थिक विकास दर का अनुमान 3.5 प्रतिशत पर बरकरार, बढ़ती तेल कीमतों और विदेशी वित्तीय दबाव के कारण पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां बढ़ीं

इस्लामाबाद/वाशिंगटन, 13 अक्टूबर (नजराना टाइम्स): अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान के लिए चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 9.9 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान पहले की तरह 3.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। मंगलवार को जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook) रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान को आने वाले महीनों में महंगाई और विदेशी भुगतान के मोर्चे पर अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

IMF ने इससे पहले जुलाई में पाकिस्तान की महंगाई दर 8.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब 1.5 प्रतिशत अंक बढ़ा दिया गया है। नया अनुमान पाकिस्तान सरकार द्वारा निर्धारित 8.2 प्रतिशत के वार्षिक महंगाई लक्ष्य से भी अधिक है।

इस बदलाव से संकेत मिलता है कि सरकार और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के लिए उपभोक्ता कीमतों को नियंत्रित रखना आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बना रह सकता है।

पाकिस्तान का चालू खाता घाटा भी बढ़ने का अनुमान

रिपोर्ट के अनुसार, IMF ने पाकिस्तान के चालू खाते के घाटे का अनुमान भी बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1.0 प्रतिशत के बराबर कर दिया है।

यह घाटा लगभग 4.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है, जो पिछले अनुमान से करीब 45 करोड़ डॉलर अधिक है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, विभिन्न क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और फारस की खाड़ी से गुजरने वाले समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान को इस बदलाव के प्रमुख कारणों के रूप में बताया गया है।

तेल के आयात पर बढ़ता खर्च पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं और भुगतान संतुलन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

इसके साथ ही स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के लिए महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के प्रयास भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

आर्थिक विकास दर 3.5 प्रतिशत रहने की संभावना

महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी के बावजूद IMF ने पाकिस्तान की वास्तविक आर्थिक विकास दर का अनुमान 3.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने देश की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई है।

उनका मानना है कि औद्योगिक गतिविधियों में तेजी, निवेश और सरकारी संस्थानों के निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से आर्थिक विकास दर 4 प्रतिशत से भी अधिक हो सकती है।

हालांकि, IMF द्वारा विकास दर के अनुमान में कोई बदलाव नहीं करना यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था पाकिस्तान की आर्थिक सुधार की गति को लेकर फिलहाल सतर्क रुख अपना रही है।

पेट्रोल की कीमतों से राहत देने वाली योजना पर IMF की आपत्ति

पाकिस्तान सरकार और IMF के बीच पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत देने के लिए शुरू की गई योजना को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों का असर घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के साथ कुछ वर्गों को नकद वित्तीय सहायता देने की योजना लागू की है।

इसके तहत मोटरसाइकिल चालकों को हर महीने 2,000 पाकिस्तानी रुपये और छोटी कारों के मालिकों को 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।

बताया गया है कि IMF ने इस योजना की लागत और लाभार्थियों के चयन के तरीके पर आपत्ति जताई है।

संस्था की चिंता है कि इस प्रकार की योजनाओं से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है और ऋण कार्यक्रम के तहत निर्धारित राजकोषीय अनुशासन के लक्ष्यों को पूरा करने में कठिनाई आ सकती है।

यह मुद्दा पाकिस्तान सरकार के सामने मौजूद उस चुनौती को भी उजागर करता है, जिसमें एक ओर आम नागरिकों को महंगाई से राहत देना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समझौतों के तहत खर्चों को नियंत्रित रखना भी आवश्यक है।

नवंबर में IMF की महत्वपूर्ण बैठक होने की संभावना

पाकिस्तान के आर्थिक सुधारों और IMF के साथ चल रहे ऋण कार्यक्रम की अगली समीक्षा नवंबर के अंतिम सप्ताह में होने की संभावना जताई गई है।

इससे पहले IMF अधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने की उम्मीद है।

संभावित कार्यकारी बोर्ड बैठक के दौरान पाकिस्तान के लिए ऋण की अगली किस्त जारी करने के मामले पर विचार किया जा सकता है।

इस समीक्षा में सरकारी खर्च, राजस्व प्रबंधन, आर्थिक सुधारों और ऋण कार्यक्रम के तहत पहले किए गए वादों के पालन को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है।

महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बड़ी चुनौती

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौतियों में महंगाई को नियंत्रित करना, विदेशी भुगतान का प्रबंधन और आर्थिक गतिविधियों को गति देना शामिल है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो पाकिस्तान में परिवहन, औद्योगिक उत्पादन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

एक ओर सरकार के सामने आम नागरिकों को महंगाई से राहत देने की जिम्मेदारी है, जबकि दूसरी ओर IMF के साथ किए गए वित्तीय समझौतों का पालन करना भी आवश्यक है।

ऐसी परिस्थितियों में पाकिस्तान की आर्थिक दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, सरकारी आर्थिक नीतियों और विदेशी वित्तीय सहायता से जुड़े फैसलों पर निर्भर करेगी।

IMF के संशोधित अनुमानों से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान को आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ विकास की गति बढ़ाने के लिए आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण नीतिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

Posted By: Ali Imran Chattha

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