फ्रांसिस हालज़ेन को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार
आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्ज़र्वेटरी और उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज में निर्णायक योगदान के लिए मिला सम्मान
स्टॉकहोम (नज़राना टाइम्स मॉनिटरिंग डेस्क): यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन के प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी फ्रांसिस हालज़ेन को वर्ष 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्ज़र्वेटरी के विकास और खगोलीय स्रोतों से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज में निर्णायक योगदान के लिए दिया गया।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने हालज़ेन को यह पुरस्कार “आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्ज़र्वेटरी में निर्णायक योगदान और खगोलीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज” के लिए देने की घोषणा की।
हालज़ेन आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्ज़र्वेटरी के प्रमुख वैज्ञानिक हैं। दक्षिणी ध्रुव पर अंटार्कटिका की बर्फ के भीतर स्थापित यह विशाल वैज्ञानिक वेधशाला लगभग एक घन किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें हजारों प्रकाश-संवेदी उपकरण लगाए गए हैं।
ब्रह्मांड को देखने का नया तरीका
न्यूट्रिनो बेहद सूक्ष्म उप-परमाण्विक कण हैं, जो सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं। इसी कारण वे अंतरिक्ष में अत्यधिक लंबी दूरी तय कर सकते हैं और रास्ते में मौजूद पदार्थ से बहुत कम प्रभावित होते हैं।
न्यूट्रिनो पर विद्युत आवेश नहीं होने के कारण चुंबकीय क्षेत्र उनके मार्ग को नहीं मोड़ते। यही विशेषता उन्हें ब्रह्मांड की अत्यधिक ऊर्जावान और दूरस्थ घटनाओं के बारे में जानकारी पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बनाती है।
इन कणों के अध्ययन से वैज्ञानिक विशाल ब्लैक होल के आसपास के क्षेत्रों, सक्रिय आकाशगंगाओं और अन्य शक्तिशाली खगोलीय स्रोतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
2013 में मिली ऐतिहासिक सफलता
आइसक्यूब का निर्माण 2011 में पूरा हुआ। इस परियोजना ने दक्षिणी ध्रुव की प्राकृतिक रूप से साफ बर्फ के लगभग एक घन किलोमीटर हिस्से को एक अनोखी वैज्ञानिक वेधशाला में बदल दिया।
2013 में आइसक्यूब के वैज्ञानिकों ने उच्च-ऊर्जा वाले खगोलीय न्यूट्रिनो की ऐतिहासिक खोज की घोषणा की। इस उपलब्धि ने खगोल विज्ञान के लिए ब्रह्मांड को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया।
इसके बाद आइसक्यूब के अध्ययनों ने उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो और दूर स्थित शक्तिशाली खगोलीय स्रोतों के बीच संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस खोज के बाद वैज्ञानिक ब्रह्मांड का अध्ययन केवल दृश्य प्रकाश, रेडियो तरंगों, एक्स-रे और गामा किरणों से ही नहीं, बल्कि न्यूट्रिनो जैसे मूलभूत कणों के माध्यम से भी करने लगे। इस नए क्षेत्र को न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान के रूप में जाना जाता है।
दशकों की वैज्ञानिक मेहनत को मिला सम्मान
फ्रांसिस हालज़ेन ने अंटार्कटिका की बर्फ को एक विशाल न्यूट्रिनो डिटेक्टर के रूप में इस्तेमाल करने की अवधारणा को वास्तविक वैज्ञानिक परियोजना में बदलने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
हालज़ेन 1972 में यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन के भौतिकी विभाग से जुड़े थे और कई दशकों तक उन वैज्ञानिक विचारों पर काम करते रहे, जिनसे आगे चलकर आइसक्यूब का विकास संभव हुआ।
नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद हालज़ेन ने आइसक्यूब की सफलता का श्रेय इस परियोजना से जुड़े अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और संस्थानों को भी दिया।
आज आइसक्यूब सहयोग में दुनिया भर के संस्थानों के सैकड़ों वैज्ञानिक शामिल हैं। वे उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो के स्रोतों, कॉस्मिक किरणों और न्यूट्रिनो के गुणों पर शोध कर रहे हैं।
फ्रांसिस हालज़ेन को मिला 2026 का नोबेल पुरस्कार आधुनिक भौतिकी और खगोल विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आइसक्यूब ने अंटार्कटिका की बर्फ को ब्रह्मांड को देखने वाले एक विशाल वैज्ञानिक उपकरण में बदलकर अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया है
Posted By: Ali Imran Chattha