विशेष अनुमति मिलने के बाद 49 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु अटारी-वाघा के रास्ते स्वदेश लौटे
अमृतसर/चंडीगढ़, 5 नवंबर (नज़राना टाइम्स): भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय की विशेष अनुमति मिलने के बाद 49 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं का जत्था अटारी-वाघा सीमा के रास्ते स्वदेश लौट गया। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के प्रयासों से मिली इस अनुमति ने श्रद्धालुओं को लंबे और महंगे हवाई सफर से राहत दी।
जत्थे में 21 पुरुष, 26 महिलाएं और दो बच्चे शामिल थे। ये श्रद्धालु पेशावर, पंजा साहिब, लाहौर, ननकाना साहिब और पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों से आए थे। करीब एक महीने की यात्रा के दौरान उन्होंने दिल्ली, अमृतसर, आनंदपुर साहिब और हेमकुंट साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन किए।
जमीनी रास्ते से वापसी के लिए मिली विशेष अनुमति
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद अटारी-वाघा सीमा से आम यात्रियों की आवाजाही निलंबित कर दी गई थी। इसलिए जत्थे की जमीनी रास्ते से वापसी के लिए विशेष अनुमति आवश्यक थी। धार्मिक स्थलों की यात्रा संबंधी 1974 के द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित अवसरों पर संगठित तीर्थयात्री जत्थों के लिए अलग व्यवस्थाएं की जाती हैं।
श्रद्धालु 8 अक्टूबर को लाहौर से ताशकंद होते हुए हवाई रास्ते से नई दिल्ली पहुंचे थे। उनके भारतीय वीज़ा की अवधि 6 नवंबर तक थी। पहले तय कार्यक्रम के अनुसार उन्हें हवाई रास्ते से पाकिस्तान लौटना था, लेकिन यात्रा की लागत और लंबे मार्ग के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
इसके बाद डीएसजीएमसी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और कमेटी के मुख्य सलाहकार परमजीत सिंह चंढोक ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क कर जत्थे को अटारी-वाघा के रास्ते वापस भेजने की अनुमति मांगी। मंजूरी मिलने के बाद उनकी वापसी की व्यवस्था की गई।
श्री हेमकुंट साहिब और श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन
जत्थे के लगभग 40 सदस्यों ने उत्तराखंड स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब के भी दर्शन किए। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 10 अक्टूबर को सर्दियों के लिए कपाट बंद होने से दो दिन पहले विशेष व्यवस्थाओं के तहत उन्हें दर्शन कराए गए।
श्रद्धालुओं ने अमृतसर में सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में माथा टेका और श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व से संबंधित कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने तख्त श्री केसगढ़ साहिब और आनंदपुर साहिब के अन्य गुरुद्वारों में भी हाजिरी भरी।
दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों में टेका माथा
दिल्ली में जत्थे ने गुरुद्वारा बंगला साहिब, गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब, गुरुद्वारा सीस गंज साहिब, गुरुद्वारा नानक प्याऊ साहिब, गुरुद्वारा दमदमा साहिब, गुरुद्वारा बाला साहिब और गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर के दर्शन किए। कई श्रद्धालुओं को भारत में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से मिलने का अवसर भी मिला।
यात्रा शुरू करने से पहले भी आई थीं कठिनाइयां
इस यात्रा के लिए शुरुआत में 104 श्रद्धालुओं को वीज़ा जारी किए गए थे। सितंबर में बच्चों सहित 94 श्रद्धालुओं के एक समूह को कथित तौर पर यात्रा दस्तावेज़ों और वापसी की टिकटों से जुड़े मुद्दों के कारण फैसलाबाद हवाई अड्डे पर विमान में सवार होने से रोक दिया गया था।
बाद में नई हवाई टिकटों और आवश्यक अनुमतियों का प्रबंध होने पर 49 सदस्यों का जत्था भारत आ सका।
वापसी की हवाई टिकटों का पैसा लौटाने के प्रयास
जत्थे के प्रमुख पपिंदर सिंह ने इस तीर्थयात्रा को जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बताया। उन्होंने भारत और पाकिस्तान की सरकारों तथा डीएसजीएमसी का आभार जताया, जिनके सहयोग से ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन और जमीनी रास्ते से स्वदेश वापसी संभव हुई।
उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं ने पहले खरीदी गई वापसी की हवाई टिकटों को रद्द कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उन्हें पैसा वापस मिलने की उम्मीद है। परमजीत सिंह चंढोक ने भी कहा कि टिकटों की राशि वापस दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
धार्मिक यात्राओं की प्रक्रिया आसान बनाने की अपील
श्रद्धालुओं ने दोनों सरकारों से धार्मिक यात्राओं के लिए आवाजाही की प्रक्रिया आसान बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सीमा के दोनों ओर रहने वाले सिख 1947 के विभाजन के बाद अलग हुए अपने ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन की इच्छा रखते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बेहतर सुविधाओं से भविष्य की तीर्थयात्राएं आसान होंगी और दोनों देशों के लोगों के बीच धार्मिक तथा सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे।