Breking News -ETPB की NOC न होने पर 92 सदस्यीय सिख जत्था फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोका गया
रमेश सिंह अरोड़ा बोले—धार्मिक यात्रा के लिए सरकारी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी; जत्थे का दावा—सभी के पास वैध भारतीय वीजा
अली इमरान चट्ठा | नज़राना टाइम्स
फैसलाबाद: श्री हेमकुंट साहिब की धार्मिक यात्रा के लिए भारत जा रहे 92 सदस्यीय पाकिस्तानी सिख जत्थे को फैसलाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने आगे की यात्रा करने से रोक दिया। अधिकारियों ने जत्थे के यात्रा दस्तावेजों और आवश्यक सरकारी मंजूरी को लेकर सवाल उठाए हैं।
पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) के अध्यक्ष सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने नज़राना टाइम्स को बताया कि जत्थे के पास इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) की ओर से जारी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं था। उनके अनुसार, पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं की विदेश धार्मिक यात्रा के लिए संबंधित प्रक्रिया के तहत यह मंजूरी आवश्यक है।
एकतरफा टिकट और वापसी व्यवस्था पर भी सवाल
रमेश सिंह अरोड़ा के अनुसार, जत्थे के सदस्य एकतरफा टिकटों पर यात्रा कर रहे थे और उनकी यात्रा किसी पंजीकृत टूर एंड ट्रैवल ऑपरेटर के माध्यम से आयोजित नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने यात्रियों की पाकिस्तान वापसी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
अरोड़ा ने कहा, “आवश्यक सरकारी प्रक्रियाएं पूरी किए बिना धार्मिक यात्रा को केवल निजी स्तर पर आयोजित नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जत्थे की ओर से पेश किए गए स्पॉन्सर पत्रों का उचित सत्यापन नहीं हुआ था और उन्हें मान्यता प्राप्त संस्थागत प्रक्रिया के बजाय निजी तौर पर तैयार कराया गया था।
नज़राना टाइम्स स्पॉन्सर दस्तावेजों से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है।
जत्थे का दावा—सभी 92 सदस्यों के पास वैध भारतीय वीजा
दूसरी ओर, जत्थे के सदस्यों ने मामले का अलग पक्ष रखा है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, जत्थे के नेता पपिंदर सिंह ने कहा कि सभी 92 सदस्यों के पास भारत के वैध वीजा थे। उनकी यात्रा फैसलाबाद से शारजाह और वहां से दिल्ली के लिए निर्धारित थी। इसके बाद जत्थे को अमृतसर, श्री आनंदपुर साहिब और श्री हेमकुंट साहिब जाना था।
श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने इस यात्रा पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए थे और फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोके जाने के कारण उनकी निर्धारित उड़ान भी छूट गई।
बताया गया है कि जत्था पहले वाघा-अटारी सीमा के रास्ते सीधे भारत जाना चाहता था। इस यात्रा के लिए वह रास्ता उपलब्ध न होने के कारण श्रद्धालुओं को संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते अधिक खर्चीला हवाई मार्ग अपनाना पड़ा।
भारत के पूर्व राज्यसभा सदस्य और पद्म भूषण से सम्मानित तरलोचन सिंह ने भी अलग से पाकिस्तानी अधिकारियों से पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं के लिए वाघा-अटारी सीमा के रास्ते यात्रा में सहूलियत देने की अपील की है।
भारत-पाकिस्तान धार्मिक यात्राओं के लिए क्या है व्यवस्था?
भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक स्थलों की यात्राएं लंबे समय से 1974 के ‘प्रोटोकॉल ऑन विजिट्स टू रिलिजियस श्राइन्स’ के तहत संचालित होती रही हैं। इसके तहत दोनों देशों में निर्धारित धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए द्विपक्षीय व्यवस्था की गई है।
इस व्यवस्था को 1950 के नेहरू-लियाकत समझौते से अलग समझना जरूरी है। नेहरू-लियाकत समझौता मुख्य रूप से भारत और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित है, जबकि सीमा पार धार्मिक स्थलों की यात्राओं के लिए 1974 का प्रोटोकॉल अलग व्यवस्था है।
पाकिस्तान में ETPB और PSGPC सिख धार्मिक यात्राओं के दौरान सुरक्षा, आवास, परिवहन और लंगर सहित विभिन्न व्यवस्थाओं में भूमिका निभाते हैं।
नज़राना टाइम्स को उपलब्ध कराई गई यात्रियों की सूची
जत्थे के संबंध में नज़राना टाइम्स को उपलब्ध कराई गई सूची में ये नाम शामिल हैं:
Himat Kour, Jaginder Singh, Saran Singh, Jaspal Kour, Jaswant Singh, Mahindar Singh, Sarjeet Kour, Jasbeer Kour, Mehat Kour, Misar Kour, Satbir Singh, Taranjeet Singh, Partab Kour, Sawindar Kour, Jagjeet Kaur, Bhawan Raj Singh, Harnaik Singh, Papinder Singh, Manmeet Singh, Neringen Singh, Saranjeet Kour, Giyan Singh, Sarbat Singh, Minderpal Kour, Aimanpreet Kaur, Tarsaim Kour, Mehak Preet Kour, Ravail Kour, Karan Veer Singh, Kartaar Kour, Har Bajan Singh, Jatendar Singh, Santok Singh, Sujan Singh, Inder Kour, Mahindarpal Singh, Mankaran Singh, Khan Singh, Mehandar Kour, Mehtab Kour, Saroop Kour, Prab Leen Kour, Kirat Kour (infant), Sawinder Singh, Satwand Kour, Mhander Singh, Amer Jeet Singh, Sardeep Singh, Jeevan Raj Singh, Kirn Raj Singh, Jasbeer Singh, Arshmeen Kaur, Gormeet Singh, Gor Mantar Kour, Anoop Kour, Kanwal Preet Singh, Balbeer Singh, Harjeet Singh, Jan Kour, Jatinder Kour, Manveer Singh, Gagan Deep Singh, Dasmeet Kour, Satwant Kour, Ranjeet Singh, Jaspreet Kour, Japnam Singh (child) और Chander Kour।
ऊपर दिए गए नाम उसी सूची के अनुसार प्रकाशित किए जा रहे हैं जो नज़राना टाइम्स को उपलब्ध कराई गई थी। प्रकाशन से पहले नामों की सही वर्तनी और प्रत्येक यात्री की स्थिति की आधिकारिक इमिग्रेशन या यात्रा रिकॉर्ड से पुष्टि करना उचित होगा।
मामला अभी अनसुलझा
इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नवीनतम जानकारी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई थी कि जत्थे को बाद में यात्रा की अनुमति दे दी गई है।
विवाद का मुख्य केंद्र ETPB की NOC, वापसी यात्रा के दस्तावेज और स्पॉन्सर संबंधी कागजात हैं। दूसरी ओर, श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके पास वैध भारतीय वीजा थे और वे अपनी धार्मिक यात्रा जारी रखने की अनुमति मांग रहे हैं।
यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत का वैध वीजा होना और पाकिस्तान से प्रस्थान के लिए आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियां दो अलग-अलग मामले हैं।
Posted By: Ali Imran Chattha