बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए खेनपो छिमेद त्सेरिंग को म्यांमार का प्रतिष्ठित “महासद्धम्म ज्योतिकधज” सम्मान

बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए खेनपो छिमेद त्सेरिंग को म्यांमार का प्रतिष्ठित “महासद्धम्म ज्योतिकधज” सम्मान

काठमांडू, 29 मई 2026: बौद्ध धर्म की शुद्धता, संरक्षण और विश्व स्तर पर उसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान के लिए म्यांमार सरकार ने खेनपो छिमेद त्सेरिंग (डॉ. ल्हारक्याल लामा) को प्रतिष्ठित धार्मिक उपाधि “महासद्धम्म ज्योतिकधज” से सम्मानित किया है।

म्यांमार सरकार हर वर्ष उन भिक्षुओं, भिक्षुणियों और बौद्ध अनुयायियों को विभिन्न धार्मिक सम्मान प्रदान करती है, जिन्होंने बौद्ध धर्म के शास्त्रीय अध्ययन, आध्यात्मिक साधना तथा बुद्ध के उपदेशों के संरक्षण और प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।

इसी क्रम में वर्ष 2026 के लिए खेनपो छिमेद त्सेरिंग को “महासद्धम्म ज्योतिकधज” की उपाधि प्रदान की गई है। यह सम्मान उन्हें बुद्ध के सच्चे धर्म को प्रकाशित करने वाले महान ध्वजवाहक के रूप में दिया गया है।

यह सम्मान शुक्रवार को काठमांडू के शंखू-शंकरापुर नगरपालिका-8 स्थित मणिचूड में नग्यूर पाल्युल लिंग मठ में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान नेपाल में म्यांमार के राजदूत थांत सीन द्वारा प्रदान किया गया।

यह इतिहास में पहली बार है कि म्यांमार सरकार ने महायान परंपरा के किसी विद्वान को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया है। पिछले वर्ष यह उपाधि कंबोडिया के सर्वोच्च बौद्ध धर्मगुरु परम पूज्य प्रेह महा सोमेधाधिपत्य कित्ती उद्देसपंडित नुन नेगत को कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन की अध्यक्षता में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान की गई थी।

सम्मान समारोह में विभिन्न देशों के राजनयिक मिशनों के प्रमुखों, धार्मिक नेताओं, श्रद्धालुओं और शुभचिंतकों की बड़ी संख्या ने भाग लिया।

समारोह में म्यांमार के राजदूत, उप मिशन प्रमुख (डीसीएम) एवं प्रथम सचिव, श्रीलंका के राजदूत, भारतीय दूतावास के उप मिशन प्रमुख, अमेरिकी दूतावास के प्रथम सचिव, बेंगलुरु स्थित महाबोधि सोसाइटी के अध्यक्ष एवं महासचिव, ऑल मॉन्क्स फेडरेशन के अध्यक्ष, योल्मो समुदाय के प्रतिनिधि तथा भूटान से डॉ. करम फुंटसोक उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त अभिषेक जोशी वास्तु, डॉ. वासुदेव शास्त्री, डॉ. चिंतामणि योगी और पुष्पराज पुरुष भी इस अवसर पर मौजूद थे।

खेनपो छिमेद त्सेरिंग को मिला म्यांमार का प्रतिष्ठित “महासद्धम्म ज्योतिकधज” सम्मान, महायान परंपरा के पहले विद्वान बने

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