लाहौर फिर दुनिया के सबसे प्रदूषित बड़े शहरों में पहले स्थान पर, एक्यूआई 344 दर्ज

लाहौर फिर दुनिया के सबसे प्रदूषित बड़े शहरों में पहले स्थान पर, एक्यूआई 344 दर्ज

लाहौर (नजराना टाइम्स): पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे दर्ज आंकड़ों के अनुसार दुनिया के सबसे प्रदूषित बड़े शहरों की सूची में फिर पहले स्थान पर रहा। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 344 दर्ज किया गया, जो खतरनाक श्रेणी में आता है।

स्विट्जरलैंड के वायु गुणवत्ता निगरानी मंच आईक्यूएयर के अनुसार, लाहौर की हवा में मुख्य प्रदूषक पीएम2.5 के बारीक कण थे। इनकी मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक औसत के लिए निर्धारित सीमा से 57 गुना अधिक दर्ज की गई। यह तुलना तत्काल दर्ज स्तर और वार्षिक दिशानिर्देश के बीच है, न कि लाहौर की वार्षिक औसत का आंकड़ा।

नई दिल्ली दूसरे स्थान पर

भारत की राजधानी नई दिल्ली 244 एक्यूआई के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहां की हवा ‘बहुत अस्वास्थ्यकर’ श्रेणी में दर्ज की गई।

अन्य प्रमुख शहरों में सेनेगल के डकार का एक्यूआई 184, मुंबई का 179 और कोलकाता का 172 रहा। तीनों शहरों की हवा ‘अस्वास्थ्यकर’ श्रेणी में थी। यह सूची संबंधित समय की रीडिंग पर आधारित है और परिस्थितियों के साथ बदल सकती है।

इकबाल टाउन में सबसे अधिक प्रदूषण

लाहौर के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी भिन्न रहा। इकबाल टाउन में सबसे अधिक एक्यूआई 535 दर्ज हुआ। बेदियां रोड स्थित एयरवॉश पर यह आंकड़ा 497 और काहना में 446 रहा।

डिफेंस फेज-5 में एक्यूआई 360, मॉडल टाउन में 350 और बरकी रोड पर 253 दर्ज किया गया। ये आंकड़े शहर के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण की गंभीर लेकिन असमान स्थिति दर्शाते हैं।

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं बारीक कण

पीएम2.5 कण इतने छोटे होते हैं कि शरीर में गहराई तक पहुंचकर रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। इनके संपर्क से स्ट्रोक, हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर और लंबे समय तक रहने वाली श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

रिपोर्ट के अनुसार, खतरनाक परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी है। ठंडे मौसम की परिस्थितियां प्रदूषकों को जमीन के पास रोक रही हैं। फसली अवशेषों का धुआं, वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक धुआं और निर्माण कार्यों की धूल मिलकर समस्या बढ़ा रहे हैं।

क्षेत्र में हर साल लौटने वाला संकट

दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र में धुंध और प्रदूषण की समस्या बार-बार सामने आती है। दिल्ली के मौसमी प्रदूषण में पड़ोसी पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को अक्सर एक योगदानकारी कारण बताया जाता है।

यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि प्रदूषित हवा बच्चों में तीव्र श्वसन संक्रमण का खतरा बढ़ाती है। वर्ष 2023 के एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में औसत जीवन प्रत्याशा पांच साल से अधिक घटा सकता है।

प्रदूषण के कारण क्षेत्र में स्कूल बंद करने पड़ते हैं, परिवहन प्रभावित होता है और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ता है। लोगों की आजीविका और दैनिक गतिविधियां भी बाधित होती हैं।

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