ऑस्ट्रेलिया में यौन अपराधों के मामले में पूर्व बिशप को साढ़े छह साल की जेल

ऑस्ट्रेलिया में यौन अपराधों के मामले में पूर्व बिशप को साढ़े छह साल की जेल

दो आदिवासी युवाओं के यौन शोषण से जुड़े 13 मामलों में दोषी करार, फरवरी 2031 में पैरोल के लिए हो सकेंगे पात्र

सिडनी, 8 अक्टूबर (नज़राना टाइम्स): ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने रोमन कैथोलिक चर्च के पूर्व बिशप क्रिस्टोफर एलन सॉन्डर्स (Christopher Alan Saunders) को दो आदिवासी युवाओं के खिलाफ यौन अपराध करने के मामले में छह साल और छह महीने की जेल की सजा सुनाई है।
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की जिला अदालत ने बुधवार, 7 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। 76 वर्षीय सॉन्डर्स को अगस्त 2026 में यौन अपराधों से संबंधित 13 आरोपों में दोषी ठहराया गया था। इनमें बिना सहमति के यौन संबंध बनाने का एक मामला और गैरकानूनी एवं अश्लील छेड़छाड़ के 12 मामले शामिल हैं।

धार्मिक पद और प्रभाव का दुरुपयोग

सॉन्डर्स दो दशकों से अधिक समय तक पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के ब्रूम क्षेत्र में कैथोलिक चर्च के बिशप रहे। यह क्षेत्र ऑस्ट्रेलिया की आदिवासी आबादी के लिए विशेष महत्व रखता है।
अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, ये अपराध वर्ष 2008 से 2019 के बीच हुए थे।
अदालत ने पाया कि सॉन्डर्स ने अपने धार्मिक पद, अधिकार और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए पीड़ित युवाओं का यौन शोषण किया।
सजा पर सुनवाई के दौरान अदालत में एक पीड़ित का बयान भी पढ़ा गया, जिसमें उसने इन घटनाओं के कारण हुए गंभीर मानसिक और भावनात्मक आघात का उल्लेख किया।

अदालत ने सुनाई साढ़े छह साल की सजा

जिला अदालत के न्यायाधीश मार्टिन फ्लिन ने सभी 13 अपराधों के लिए सॉन्डर्स को कुल छह साल और छह महीने की जेल की सजा सुनाई।
अदालत ने सजा की अवधि 12 अगस्त 2026 से प्रभावी मानी है। सॉन्डर्स न्यूनतम साढ़े चार साल की कैद पूरी करने के बाद फरवरी 2031 में पैरोल के लिए पात्र हो सकते हैं।
हालांकि, पैरोल की पात्रता का अर्थ यह नहीं है कि उनकी रिहाई निश्चित है।

पहले भी हुई थी जांच, वेटिकन ने भी लिया था संज्ञान

सॉन्डर्स के खिलाफ यौन शोषण के आरोप सामने आने के बाद उन्होंने वर्ष 2020 में बिशप के रूप में अपनी जिम्मेदारियों से अलग होने का फैसला किया था।
प्रारंभिक पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने के कारण उस समय उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी।
इसके बाद मामले में आगे की जांच हुई और वेटिकन ने भी उनके आचरण से संबंधित आरोपों की जांच शुरू की।
बाद में ऑस्ट्रेलियाई आपराधिक न्याय प्रणाली के तहत मामला अदालत तक पहुंचा, जहां उन्हें दोषी ठहराया गया और जेल की सजा सुनाई गई।

कैथोलिक चर्च ने पीड़ितों से मांगी माफी

अदालत के फैसले के बाद ऑस्ट्रेलियाई कैथोलिक बिशप सम्मेलन के अध्यक्ष आर्चबिशप टिमोथी कॉस्टेलो ने पीड़ितों के साथ हुए अन्याय और उन्हें पहुंची पीड़ा पर दुख व्यक्त करते हुए माफी मांगी।
उन्होंने धार्मिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस मामले ने एक बार फिर धार्मिक संस्थानों में प्रभावशाली पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही और कमजोर वर्गों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने ला दिया है।
पूर्व बिशप को सुनाई गई यह सजा ऑस्ट्रेलिया में धार्मिक संस्थानों से जुड़े यौन शोषण के मामलों में न्यायिक कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है।

स्रोत: डॉन/एएफपी, 8 अक्टूबर 2026

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