शहीद मोहतर्मा बेनज़ीर भुट्टो की 18वीं शहादत बरसी पर श्रद्धांजलि
- इंटरनेशनल
- 27 Dec, 2025 09:35 PM (Asia/Kolkata)
शहीद मोहतर्मा बेनज़ीर भुट्टो की 18वीं शहादत बरसी पर श्रद्धांजलि
अली इमरान चठ्ठा| नज़राना टाइम्स
आज, 27 दिसंबर 2025 को पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री और देश के राजनीतिक इतिहास की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक, शहीद मोहतर्मा बेनज़ीर भुट्टो की 18वीं शहादत बरसी मनाई जा रही है।
21 जून 1953 को कराची में जन्मी बेनज़ीर भुट्टो, पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो और बेगम नुसरत भुट्टो की सबसे बड़ी संतान थीं। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय और बाद में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की, जहाँ वे ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन की अध्यक्ष बनने वाली पहली एशियाई महिला बनीं।
1977 में जनरल ज़िया-उल-हक़ के सैन्य तख्तापलट के बाद उनके जीवन ने निर्णायक मोड़ लिया। 1979 में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की फांसी के बाद बेनज़ीर ने नजरबंदी, कैद और निर्वासन का कठिन दौर झेला। इसी संघर्ष से वह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की नेता बनकर उभरीं और सैन्य तानाशाही के खिलाफ प्रतिरोध की प्रतीक बनीं।
दिसंबर 1988 में मात्र 35 वर्ष की आयु में उन्होंने इतिहास रचते हुए किसी भी मुस्लिम-बहुल देश की पहली निर्वाचित महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने 1988–1990 और 1993–1996 के बीच दो कार्यकाल पूरे किए। उनके कार्यकाल में महिला अधिकारों, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया, हालांकि दोनों सरकारें राजनीतिक विवादों के बीच समाप्त हुईं।
लगभग एक दशक के निर्वासन के बाद वह 18 अक्टूबर 2007 को पाकिस्तान लौटीं। लेकिन 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी के लियाक़त बाग़ में एक चुनावी सभा के बाद उन पर घातक हमला किया गया, जिसमें 20 से अधिक लोग मारे गए। उनकी हत्या के हालात आज भी विवाद और जांच का विषय बने हुए हैं।
उनकी अंतिम विश्राम स्थली गढ़ी खुदा बख्श, लारकाना में भुट्टो परिवार का मक़बरा है, जहाँ हर साल हजारों लोग श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
उनका मशहूर कथन — “लोकतंत्र सबसे अच्छा बदला है” — आज भी पाकिस्तान की राजनीति में गूंजता है। 18 वर्ष बाद भी शहीद मोहतर्मा बेनज़ीर भुट्टो को लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और नागरिक शासन के लिए बलिदान देने वाली नेता के रूप में याद किया जाता है।
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